पूर्व बसपा विधायक राकेश बाबू विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे पूर्व विधायक राकेश बाबू और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद कुमार को अनुशासनहीनता व पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण बसपा से निष्कासित किया गया है। बसपा मंडल कॉर्डिनेटर ने यह जानकारी दी।
वर्ष 2007 एवं 2012 में बसपा के टिकट पर टूंडला विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे राकेश बाबू को बसपा से निष्काषित कर दिया गया है। राकेश बाबू के साथ ही उनके पुत्र और वर्ष 2007 में जिला पंचायत अध्यक्ष रहे प्रमोद कुमार को भी पार्टी ने निष्कासित कर दिया।
दोनों के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने एवं अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। बसपा के मंडल कॉर्डिनेटर अनिल कुमार भाटिया ने बताया पूर्व विधायक राकेश बाबू एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद कुमार को पूर्व में कई बार चेतावनी जारी की गई थी।
पूर्व विधायक राकेश बाबू एवं प्रमोद कुमार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर अनुशासनहीनता का परिचय दे रहे थे। कई बार चेतावनी के बाद भी सुधार नहीं होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। मुकेश कुमार उर्फ टीटू प्रधान, जिलाध्यक्ष बसपा
बसपा के पूर्व विधायक राकेश बाबू एडवोकेट एक साल से पार्टी से दूरी बनाए हुए थे। बसपा के आयोजनों में वह शामिल नहीं हो रहे थे। वहीं उनके पुत्र पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद कुमार की हिंदू संगठनों से करीबी बढ़ गई थी। हिंदू जागरण मंच के आयोजनों को उन्होंने साझा करना शुरू कर दिया था।
बसपा के पूर्व विधायक राकेश बाबू का बसपा से निष्कासन पहले से ही तय माना जा रहा था। टूंडला विधानसभा क्षेत्र से पार्टी उन्हें चार बार चुनाव में उतार चुकी है। दो बार वह जीत कर विधानसभा भी पहुंचे।
विधायक बनने से पहले राकेश बाबू बसपा से नगर पालिका में सभासद भी चुने गए। उनकी गिनती खांटी बसपा नेताओं में की जाती रही है। टूंडला विधानसभा क्षेत्र से इस्तीफा देकर भाजपा के निर्वतमान विधायक और पूर्व मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल के आगरा से सांसद चुन लिए जाने के बाद टूंडला में उपचुनाव की तैयारी शुरू हो गई।
उपचुनाव में यूं तो राकेश बाबू बसपा से प्रबल दावेदार थे लेकिन पार्टी पूर्व एमएलसी सुनील चित्तौड़ को चुनाव लड़ने की हरी झंडी देकर राकेश बाबू का पत्ता काट दिया था।
उधर यूपी में भाजपा की सरकार बनने के बाद राकेश बाबू के पुत्र पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद कुमार का रुझान आरएसएस से जुडे़ अनुसांगिक संगठनों की तरफ होने लगा। इन संगठनों के आयोजनों में प्रमोद कुमार की उपस्थिति भी बसपा को अखर रही थी।