डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय पाठक और उनके करीबी अजय मिश्रा के खिलाफ लखनऊ में मुकदमा दर्ज हुआ है। जांच एसटीएफ कर रही है। विश्वविद्यालय में हुए भ्रष्टाचार के मामले में अब आगरा में भी मुकदमे की तैयारी कर ली गई है। इसमें कॉलेजों की मान्यता, संबद्धता, सेंटर बनाने, निर्माण कार्य आदि में कमीशन और रिश्वत के मामले उजागर होंगे। एसटीएफ के रडार पर दस से अधिक अधिकारी और कर्मचारी हैं, जिन्होंने मोटा मुनाफा कमाया है।
लखनऊ से पांच सदस्यीय टीम मंगलवार शाम को आगरा पहुंची। सूत्रों ने बताया कि टीम ने आते ही एसटीएफ कार्यालय पहुंचकर जांच से संबंधित दस्तावेजों को देखा। इसके बाद विश्वविद्यालय के संस्कृति भवन गई। टीम का नेतृत्व सीओ कर रहे हैं। संस्कृति भवन के फोटोग्राफ लिए गए हैं। उसको बनाने में खर्च हुए बजट की जानकारी ली। बुधवार को टीम विश्वविद्यालय जा सकती है। इस दौरान कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक पूछताछ की जाएगी।
विश्वविद्यालय के कर्मचारी और अधिकारी एसटीएफ के रडार पर हैं। यह पता किया जा रहा है कि करोड़ों की संपत्ति बनाने वाले कौन-कौन हैं। आय से अधिक संपत्ति किसने जुटाई है। इसके लिए गोपनीय सूचनाएं भी ली जा रही है। आरोपों में घिरे प्रो. पाठक की संपत्ति की जांच भी एसटीएफ ने शुरू कर दी है। इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उनके बेटे के विदेश में रहने की जानकारी मिली है। प्रो. पाठक खुद भी कई बार विदेश जा चुके हैं।
एसटीएफ, आगरा यूनिट के एसपी राकेश कुमार ने बताया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय पाठक और अजय मिश्र के मामले में जांच जारी है। भ्रष्टाचार की और भी शिकायत मिली हैं। एसटीएफ साक्ष्य संकलन कर रही है। कुछ मामलों में पुख्ता साक्ष्य मिल गए हैं। इस पर मुकदमे दर्ज कराने की तैयारी कर ली गई है।