मैनपुरी। फर्जी शिक्षकों के बर्खास्तगी का मामला एक फिर से टल गया है। बेगुनाही साबित करने के लिए उन्हें एक और मौका दिया जाएगा। जिला प्रशासन की मंशा है कि उन्हें कोर्ट से किसी प्रकार की राहत न मिल सके। इसे देखते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। जिला समिति के पास बर्खास्तगी के लिए भेजी गईं फाइलों को वापस कर दिया गया है।
तीन दिन पहले बीएसए ने जिला समिति के सामने फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी के लिए फाइलें भेजी थीं। जिला समिति ने बैठक कर मामले में गहन चर्चा की। साथ ही फर्जी शिक्षकों को कोर्ट से राहत न मिल सके, इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर उनका बयान दर्ज कराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद ही उनकी बर्खास्तगी करने की बात कही गई।
यह है मामला
एसआईटी ने जिले में कार्यरत 81 शिक्षकों के अभिलेख फर्जी बताए थे। इसके बाद से लगातार इन शिक्षकों की बर्खास्तगी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दो वर्ष बाद भी उन्हें बर्खास्त नहीं किया जा सका है। दिसंबर 2017 में उन्हें पहला बर्खास्तगी नोटिस जारी किया गया था।
वर्ष 2018 में दूसरा तथा इसके बाद मामला कोर्ट में चलता रहा। कोर्ट ने जब कार्रवाई के निर्देश दिए तो 22 सितंबर 2019 को बर्खास्तगी के लिए अंतिम नोटिस जारी किया गया। इसमें 10 दिन तक का समय दिया गया था। शिक्षकों द्वारा दिए गए जवाब से विभाग और अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं।
जिला समिति को पूरी रिपोर्ट सौंप दी गई है। जिला समिति उसमें कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम कर रही है। विभाग की मंशा है कि कुछ भी ऐसा न छोड़ा जाए जो कोर्ट से राहत मिल सके। इसलिए मामले में देरी हो रही है। शीघ्र ही फर्जी शिक्षकों की सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।
-विजय प्रताप सिंह बीएसए