आगरा। विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा खरीदने के बावजूद उसकी जानकारी अपने आयकर रिटर्न (आईटीआर) में न देना 30 से अधिक लोगों को भारी पड़ गया है। आयकर विभाग ने पिछले वर्षों के रिटर्न की रैंडम जांच के आधार पर ऐसे कर चोरों को चिह्नित कर उनको नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
आयकर विभाग ने अपनी आंतरिक जांच और आंकड़ों के मिलान के दौरान पाया कि करदाताओं ने लाखों रुपये की विदेशी मुद्रा खरीदी और विदेश यात्राएं कीं, लेकिन इस पूरे खर्च और लेन-देन को अपने वार्षिक आयकर रिटर्न में पूरी तरह छिपा लिया। दरअसल, जब भी कोई व्यक्ति विदेश यात्रा या विदेशी पर्यटन पैकेज के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा खरीदता है, तो उसके स्थायी खाता संख्या (पैन) के माध्यम से यह जानकारी संबंधित बैंक द्वारा सीधे आयकर विभाग के पास पहुंच जाती है। करदाताओं की विदेशी मुद्रा खरीद टीसीएस के डिजिटल रिकॉर्ड में सामने आ गई। विभाग ने अब इन सभी संदिग्ध मामलों की जांच कर रहा है। नोटिस पाने वाले लोगों को इस खर्च का पूरा हिसाब देना होगा। साथ ही इस आय का स्रोत भी बताना होगा।
क्या है नियम
जब भी कोई एक वित्त वर्ष में 10 लाख से अधिक की विदेशी मुद्रा या फॉरेक्स कार्ड लेता है तो सरकार उस पर टीसीएस ( टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) काटती है। यह टैक्स करदाता के आयकर रिटर्न में एडजस्ट या रिफंड हो जाता है। विभाग केवल यह देखता है कि क्या आपकी घोषित आय इतने बड़े खर्च को सपोर्ट करती है या नहीं। अगर आय और खर्च में अंतर दिखता है तो विभाग कर चोरी के नजरिये से जांच शुरू कर कर दाता को नोटिस जारी कर जवाब मांगता है।