फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: कोख तक पहुंचा फ्लोराइड का जहर, जन्म ले रहे कुपोषित बच्चे; डरा देंगे फिरोजाबाद के ये आंकड़े

Thu, 30 Jul 2026 01:40 PM IST
Dhirendra Singh अबरार अहमद, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, फिरोजाबाद

सार

फिरोजाबाद के फ्लोराइड प्रभावित इलाकों में दूषित पानी गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लोराइड की अधिक मात्रा कम वजन और कुपोषित बच्चों के जन्म की बड़ी वजह बन रही है।
 
विज्ञापन
कोख तक पहुंचा फ्लोराइड का जहर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पानी में घुला फ्लोराइड का जहर अब गर्भ तक पहुंच गया है। इसके इस्तेमाल से  गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम की मात्रा प्रभावित हो रही है, जिससे कमजोर और कम वजन के कुपोषित बच्चे पैदा हो रहे हैं। हालत यह है कि हर माह औसतन दो हजार बच्चे प्रभावित मिल रहे हैं। जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के मुताबिक, कांच नगरी में जुलाई माह में  2,354 बच्चे कुपोषित और 559 बच्चे अति कुपोषित मिले। जून में यह आंकड़ा 2,542 और 667 था।
विज्ञापन


जल जीवन मिशन के सर्वे में जिले के 790 गांवों में से 351 के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। कई इलाकों में फ्लोराइड की मात्रा तीन मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है, जो मानक से काफी अधिक है। खासतौर पर टूंडला, नारखी, हाथवंत, एका और जसराना ब्लॉक के कई गांव इससे प्रभावित हैं। इनमें एटा जिले से सटे हुए कुछ गांव भी शामिल हैं। अगस्त 2023 में 2500 करोड़ रुपये से अधिक की 'हर घर नल से जल' योजना शुरू होने पर उम्मीद जगी थी कि इस समस्या से निजात मिलेगी, लेकिन अब तक यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है।



 

सीएमएस डॉ. रमेश चंद केशव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिकोहाबाद संयुक्त चिकित्सालय स्थित 10 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के प्रमुख व अस्पताल के सीएमएस डॉ. रमेश चंद केशव कहते हैं कि जिले में कुपोषण फैलने के पीछे फ्लोराइड युक्त पानी और गर्भवती महिलाओं व माताओं की ओर से बरती जाने वाली लापरवाही बड़ी वजह है। गर्भवती महिलाएं जब फ्लोराइड युक्त पानी पीती हैं तो उनके शरीर में कैल्शियम प्रभावित होता है, जिससे कमजोर और कम वजन का बच्चा पैदा होता है। गर्भावस्था के दौरान सही खान-पान न होना और जन्म के बाद बच्चे को उचित पोषण न मिलना भी बच्चों को कुपोषण की ओर धकेल रहा है। उन्होंने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में इस समय 7 कुपोषित बच्चों का उपचार चल रहा है।

 

एनआरसी में बीते सात दिन से अपने बच्चे का इलाज करा रहीं हाथवंत निवासी प्रियंका देवी ने बताया कि वह जहां रहती हैं, वहां खारा पानी आता है। जन्म के समय उनके बच्चे का वजन केवल 1.8 किलो था, जो अब सुधरकर 3.8 किलो हो गया है। वहीं, शिकोहाबाद निवासी संगीता देवी ने बताया कि उनका बेटा सौरभ 6 माह का है। जन्म के समय उसका वजन 1.6 किग्रा था, अब इलाज के बाद वजन 3.4 किलो हो गया है।

 

केसरी नंदन तिवारी, जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार अधिकारी केसरी नंदन तिवारी ने बताया कि पुष्टाहार की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने के पीछे निर्धारित मेन्यू में हुए बदलाव के कारण उत्पादन धीमा होना बताया जा रहा है, हालांकि यह आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं है। इस वजह से आंगनबाड़ी केंद्रों तक आपूर्ति नहीं पहुंच रही है। हालांकि, शासन स्तर पर इसे सुचारू  करने पर काम किया जा रहा है।

 

 नमामि गंगे एडीएम  मोहनलाल गुप्ता ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना का काम दिसंबर 2027 तक पूरा करने का  लक्ष्य है। बजट आने के बाद काम फिर शुरू हो गया है। जल्द दोबारा पानी के नमूनों की जांच कराई जाएगी। प्रयास करेंगे कि फ्लोराइड प्रभावित गांवों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत पानी की आपूर्ति पहले कराई जाए।

 

फ्लोराइड प्रभावित गांव
टूंडला ब्लॉक: गांव रामगढ़ उर्फ उम्मरगढ़, चिलासनी, इमलिया, जालिमपुर, ऐरई, रजापुर, 
नगला पार, नगला वीरी, कुतुकपुर, नगला गुमानी, तजापुर, कसगंजा, लखनई, बेलनगंज, बाघई, 
भैंसाब्रजपुर, रजावली।
नारखी ब्लॉक: गांव गांगनी, राजपुर, मनिया खेड़ा, नारखी धौकल, कुबेर गढ़ी, ओखरा 
मदनपुर, रामपुर, परीक्षतपुर, कायथा, नगला बदे, नगला नौजी, नगला गूजरिया, मरसलगंज, 
नगला सेमरिया, नगला कढ़ेरू, मोहम्मदपुर।
हाथवंत ब्लॉक: गांव पोहपगढ़, रंधीरपुरा, हाथवंत, इटाहरी, कमालपुर, रखावली, अगोधा, 
मढ़ा, फोखटी, साहूमई, रीवा, पथरउआ, नगला शीश, नगला भादों, नगला भूड़, खेरिया।

 

मई के बाद से नहीं बंटा पुष्टाहार
कुपोषण से जंग में सबसे बड़ा हथियार पुष्टाहार होता है, लेकिन जिले में इसकी आपूर्ति ठप है।  आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए पुष्टाहार वितरण कराने की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नाफेड) के पास है, लेकिन जिले में अब तक मई माह का ही पुष्टाहार बांटा जा सका है। जून और जुलाई का पुष्टाहार अब तक नहीं बंटा, जबकि जिले में 15,036 गर्भवती और 15,520 स्तनपान कराने वाली माताएं पंजीकृत हैं।


 
विज्ञापन

जानिए पानी में कितना फ्लोराइड है सुरक्षित
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने पीने के पानी में फ्लोराइड की सुरक्षित मात्रा तय की है। सबसे सुरक्षित और आदर्श स्तर 1 मिलीग्राम प्रति लीटर है यानी एक लीटर पानी में फ्लोराइड की मात्रा एक मिलीग्राम होनी चाहिए। इसकी मात्रा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक मात्रा होने पर फ्लोराइड जहर का काम करने लगता है। यह सीधे हड्डियों (कंकाल फ्लोरोसिस), दांतों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के विकास को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें