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कोटा बैराज से चंबल में छोड़ा गया 2.85 लाख क्यूसेक पानी, बीहड़ के कई गांवों में बाढ़ का खतरा

Thu, 29 Aug 2019 02:56 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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उफान पर बह रही गंगा नदी - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान के कोटा बैराज से दो किस्तों में छोडे़ गए 2.85 लाख क्यूसेक पानी ने चंबल नदी फिर उफान पर बहने लगी है। बाह क्षेत्र के 35 गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। बुधवार को नदी का जलस्तर 3 मीटर बढ़कर 122 मीटर पहुंच गया। इससे खादर और कछार के खेत जलमग्न हो गए। बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने भी हाईअलर्ट जारी कर आठ बाढ़ चौकियां गठित कर दी हैं।
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कई इलाकों में पहुंचा बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
खतरे के निशान के करीब पहुंच कर शांत हुई चंबल नदी में राजस्थान के कोटा बैराज से 2.85 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। जिससे बाह के 35 गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। नदी में 3 दिन में 7 मीटर पानी बढ़ गया है। जिससे नदी किनारे के गांवों के बीहड़ से जुड़ने वाले रास्ते, खादर और तराई के खेत जलमग्न हो गए हैं। 
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तेजी से बढ़ रहा चंबल नदी का जल स्तर - फोटो : अमर उजाला
गांवों में पानी घुसने के खतरे को देखते हुए लोग रातभर नदी के जलस्तर पर नजर रखने को मजबूर हैं। वहीं प्रशासन ने तटवर्तीय गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। लेखपालों को गांव में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। चंबल के उफान से प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद एसडीएम बाह महेश प्रकाश गुप्ता, तहसीलदार बाह हेमचंद्र शर्मा ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। 

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कई इलाकों में पहुंचा बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
बाह क्षेत्र के गांव मंसुखपुरा, पिनाहट, उमरैठा, बासौनी, भगवानपुरा, सिमराई, नंदगवां, खेड़ाराठौर में बाढ़ चौकियां बनाई गई है। इन पर कर्मचारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है। वहीं बाढ़ से रेहा, बरेंडा, तासौड़, करकौली, मंहगौली, विप्रावली, पिनाहट, उटसाना, क्योरी, उमरैठा, बघरैना, बासौनी, जेबरा, कुंवरखेड़ा, बमरौली, पुराभगवान, गौंसिली, सिमराई, गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, खेड़ाराठौर समेत कई गांव प्रभावित हो सकते हैं।  
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बाढ़ से बर्बाद हुई फसलें - फोटो : अमर उजाला
यमुना नदी का जलस्तर स्थिर रहा। वहीं कछार के खेतों में अब भी पानी भरा है। खेतों में खड़ी फसल नष्ट होने से ग्रामीण किसान परेशान हैं। नदी किनारे के चरीथा, रामपुर चंद्रसैनी, कांकर, बुढै़रा, बटेश्वर, भौंर, कोटकापुरा, बड़ापुरा, विक्रमपुर, नौगवां, कमतरी, पारना, नगला सुरई, खिलावली, गढ़ी बरौली आदि गांवों के तराई के खेतों में पानी भरे होने से बाजरे और तिल की फसल सड़कर नष्ट हो गई है। 
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