कासगंज। बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित गांव को राहत नहीं मिल रही है। सोमवार को जलस्तर 5 सेंटीमीटर की गिरावट के साथ ही 163.80 दर्ज किया गया। इसके बावजूद गांव में भरे पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का मानना है कि जब तक बाढ़ का लेवल साधारण स्तर तक नहीं आएगा तब तक यह समस्या बनी रहेगी । बाढ़ प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है। सबसे ज्यादा परेशानी पशुओं के चारे की है।
सोमवार को गंगा के जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की कमी आई और बाढ़ का स्तर मध्यम से घटकर निम्न पर आ गया। सोमवार को नरौरा बैराज से गंगा नदी में 147051 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हरिद्वार से 82762 क्यूसेक और बिजनौर से 54275 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हरिद्वार और बिजनौर से जहां पानी पिछले दो दिन की तुलना में कम छोड़ा गया है।
वहीं नरौरा यह करीब आठ हजार क्यूसेक ज्यादा है। इससे फिलहाल जलस्तर में ज्यादा गिरावट के आसार नहीं हैं। ऐसी स्थिति देखते हुए प्रभावित गांव के लोगों का मानना है कि जब तक जलस्तर साधारण नहीं होगा तब तक प्रभावित इलाकों को राहत नहीं मिलेगी। कादरगंज के असलम खान ने बताया कि पटियाली का इलाका निचला इलाका है जिससे हर बार यहां आपदा से बर्बादी होती है।
बाढ़ प्रभावित गांव मेहोल, पनसोती, मूंझखेड़ा, जिजौल, हिम्मतनगर बझेरा, नगला मुंता, उलाई खेड़ा, अजीतनगर, बमनपुरा, नगला खिमाई, कादरगंज खाम व आस-पास के अन्य गांव में सर्वाधिक परेशानी पशुओं के चारे की है। खेतों में पानी भरा होने के कारण ग्रामीण चारा नहीं काट पा रहे। इससे हरे चारे की समस्या बनीं हुई है। दिन के समय में सूखे और ऊंचे इलाकों की ओर ग्रामीण पशुओं को ले जाते हैं। आबादी के बीच पानी भरा होने से ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही हैं। कच्चे मकानों की दीवारें भी नमी से खराब हो रहीं हैं।
बाढ़ का स्तर
- साधारण बाढ़- 30 हजार क्यूसेक से 1 लाख क्यूसेक।
- निम्न बाढ़ - 1 लाख क्यूसेक से डेढ़ लाख क्यूसेक।
- मध्यम बाढ़ - 1.5 लाख क्यूसेक से 2.5 लाख क्यूसेक।
- 2.5 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने पर यह खतरनाक हो जाता है।
- गंगा के जलस्तर में कमी आई है। जो प्रभावित गांव हैं अभी उन इलाकों में बाढ़ का असर बना हुआ है। सभी बांध और तटबंध सुरक्षित हैं। 24 घंटे नियंत्रण कक्ष संचालित है। पूरी तरह से निगरानी जारी है। - अजय श्रीवास्तव, एडीएम।