कासगंज। पड़ोसी जिला बदायूं में गंगानदी के कटान से कासगंज में भी संवेदनशीलता बढ़ गई है। सिंचाई विभाग ने कटान से निपटने के लिए तैयारी कर ली है। गंगा किनारे संवेदनशील इलाकों में जगह-जगह पीपी(पॉलीप्रोपाइलिन) बैग रखवा दिए गए हैं।
बैराजों से पानी का दबाव कम होने से गंगा का जलस्तर कम होता जा रहा है। रविवार को यह 15 सेंटीमीटर कम होकर 162.95 हो गया। लेकिन धार तेज होने से कटान का खतरा बरकरार है। पड़ोसी जिला बदायूं में गंगानदी तेजगति से कटान कर रही है। गंगा किनारे के गांवों में कई मकान बहाव से ढह गए हैं। इसी को देखते हुए सिंचाई विभाग मिट्टी भरकर पीपी बैग गंगा किनारे संवेदनशील इलाकों में रखवा दिए हैं।
सभी बांधों के अलावा अन्य संवेदनशील इलाकों में तैयारी की गई है। सिंचाई विभाग जलस्तर और गंगा की धारा पर नजर बनाए हुए है। हालांकि अभी जिले में बाढ़ और कटान का खतरा नहीं है। कुछ दिनों में पहले मेहोला और निबिया गांव में कटान शुरू हुआ तो विभाग ने यहां स्टड बनाकर रोक दिया था।
आंकड़े की नजर से-
- 6 बांधों पर कराया गया है कटानरोधी काम।
- 1 हजार से अधिक पीपी बैग संवेदनशील इलाकों में रखवाए गए।
- 8 स्थान जिलेभर में गंगा किनारे सबसे अधिक संवेदनशील।
रविवार को छोड़ा गया पानी
- 61378 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोड़ा गया।
- 40330 क्यूसेक पानी बिजनौर बैराज से छोड़ा गया।
- 36447 क्यूसेक पानी नरौरा बैराज से छोड़ा गया।
- कछला गंगानदी में जलस्तर दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है। जिले में बाढ़ और कटान का फिलहाल कोई खतरा नहीं है, लेकिन फिर भी कटान से निपटने की तैयारी कर ली गई है। पीपी बैग जगह-जगह रखवा दिए गए हैं।- पंजाबी शर्मा, बाढ़ नियंत्रण प्रभारी।