फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Agra News: जूते की सिलाई कर घर चला रहीं 500 महिलाएं, ओडीओपी योजना से जुड़कर बनीं आत्मनिर्भर

Thu, 05 Jan 2023 04:26 PM IST
मुकेश कुमार सलोनी देशपांडे, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आगरा के कछपुरा की 500 महिलाएं जूते की सिलाई और बुनाई का काम कर पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने परिवार की जिम्मेदारी उठा रही हैं।
विज्ञापन
जूतों की सिलाई करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

साथी हाथ बढ़ाना... यह महज एक फिल्म का गाना नहीं बल्कि आगरा के कछपुरा की महिलाओं के जीवन का फलसफा है। यहां की करीब 500 महिलाएं जूते की सिलाई और बुनाई का काम कर पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने परिवार की जिम्मेदारी उठा रही हैं।

विज्ञापन


उन्होंने बताया कि पहले तो लोगों ने काम करने पर आलोचना की, पति ने काम करने से रोका, कि लोग क्या कहेंगे। आज वही लोग उनके काम की सराहना करते हैं। सरकार की ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना से जुड़कर ये महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। 

बच्चों की फीस निकालना भी मुश्किल था

आदर्श सेवा समिति की सीओ गीता पिप्पल ने बताया कि कछपुरा की अधिकतर महिलाओं के घर की स्थिति ठीक नहीं थी। पति मजदूरी करते हैं, उनकी कमाई से घर का खर्चा चलाना और बच्चों के स्कूल की फीस भरना मुश्किल था। महिलाओं को काम के लिए प्रेरित कर किया। ओडीओपी से जोड़कर महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाया और सभी महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं। 

विज्ञापन

पति ने किया था मना

बेबी ने बताया कि जूते की सिलाई और बुनाई का काम करने के लिए पहले पति मना करते थे। पति के काम पर जाने के बाद महिलाओं के साथ मिलकर हमने भी काम करना शुरू कर दिया। अब पति भी सहयोग करते हैं। 

फैक्टरियों से आ रहे ऑर्डर

ममता का कहना है कि पति जूता बनाने का काम करते थे। एक जिला एक उत्पाद के तहत प्रशिक्षण लिया तो जूता बनाने का कार्य अच्छे से आ गया। फैक्टरियों से ऑर्डर भी आने लगे हैं। अब अन्य महिलाओं को भी रोजगार दूंगी।

बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा सकते हैं

कमलेश ने बताया कि काफी समय से जूते की सिलाई और बुनाई का काम कर रही हूं। अपनी कमाई से हम कम से कम अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा तो सकते हैं। पति की कमाई से तो घर खर्च भी नहीं चलता था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें