साथी हाथ बढ़ाना... यह महज एक फिल्म का गाना नहीं बल्कि आगरा के कछपुरा की महिलाओं के जीवन का फलसफा है। यहां की करीब 500 महिलाएं जूते की सिलाई और बुनाई का काम कर पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने परिवार की जिम्मेदारी उठा रही हैं।
उन्होंने बताया कि पहले तो लोगों ने काम करने पर आलोचना की, पति ने काम करने से रोका, कि लोग क्या कहेंगे। आज वही लोग उनके काम की सराहना करते हैं। सरकार की ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना से जुड़कर ये महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं।
बच्चों की फीस निकालना भी मुश्किल था
आदर्श सेवा समिति की सीओ गीता पिप्पल ने बताया कि कछपुरा की अधिकतर महिलाओं के घर की स्थिति ठीक नहीं थी। पति मजदूरी करते हैं, उनकी कमाई से घर का खर्चा चलाना और बच्चों के स्कूल की फीस भरना मुश्किल था। महिलाओं को काम के लिए प्रेरित कर किया। ओडीओपी से जोड़कर महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाया और सभी महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं।