एसपी सिटी ने बताया कि आरोपियों के पास से आठ लैपटॉप मिले हैं। प्राथमिक जांच में पुलिस को 500 अमेरिकी नागरिकों का डाटा इन लैपटॉप में मिला है। इनमें नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि की जानकारी है।
पुलिस ने कुछ लोगों से संपर्क का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। अब पुलिस ईमेल करके लोगों से संपर्क करेगी। अगर, कोई शिकायत करेगा तो उसे केस में शामिल किया जाएगा। क्योंकि पुलिस के पास कोई शिकायत नहीं है। यह भी पता चल जाएगा कि कितने लोगों से कितने की धोखाधड़ी हुई।
मोबाइल में भी मिले लोगों के नंबर
पुलिस ने आरोपियों के पास से 16 मोबाइल भी बरामद किए हैं। इन मोबाइल में सैकड़ों लोगों के नंबर है। पुलिस मोबाइल की जांच कर रही है। कॉल डिटेल भी निकाली जाएगी। यह देखा जाएगा कि गैंग के साथ कोई और तो नहीं जुड़ा है।
गौरव दिल्ली में छोड़कर आया था नौकरी
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि आरोपी गौरव बीटेक पास है। उसने आरबीएस कॉलेज से इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग की है। वह दिल्ली में नौकरी करने गया था। मगर, आठ महीने बाद ही नौकरी छोड़ दी। उसे किसी ने बताया कि बीपीओ सेक्टर की कंपनी खोली जाए। इससे लोगों को कॉल करके ठगी का शिकार बना सकते हैं।
उसने वर्ष 2018 में कंपनी का पंजीकरण कराया। जिस कार्य के लिए कंपनी खोली थी, वो नहीं किया। इसमें अमेरिकी लोगों को कॉल करके ठगी की जाने लगी। मगर, लॉकडाउन में काम बंद हो गया। अब फिर से गुलमोहर वाटिका में दो महीने पहले कंपनी खोल ली। 20 दिन से काम शुरू किया था। गौरव अपने साथी आशीष और वसीम को 22-22 रुपये प्रतिमाह सैलरी देता था।
मां के खाते में जमा करता था रकम
पुलिस के मुताबिक, गौरव को पता था कि विदेश से डॉलर से बदलकर रुपये में रकम आने पर टैक्स लगता है। इसलिए वह अपनी मां सीमा के केनरा बैंक के खाते में रकम अमेरिकी नागरिकों से ई वाउचर के माध्यम से जमा कराता था। इसके बाद उसे अपनी मां के खाते से निकाल लेता था। पुलिस खाते की डिटेल निकलवा रही है। इससे पता चल जाएगा कि खाते में कितनी रकम कब से जमा हुई। उसे कब-कब निकाला गया।
अंग्रेजी में बात करते हैं आरोपी
पुलिस ने बताया कि आरोपी गौरव बीटेक, वसीम स्नातक और आशीष बीकॉम पास है। वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। अमेरिकी नागरिकों को पहले ईमेल करते थे। इसके बाद उनसे कॉल पर अंग्रेजी में ही बात करते थे। यह अहसास नहीं होने देते थे कि वह भारत से बोल रहे हैं।