इन लोगों ने जीएसटी चोरी के उद्देश्य से मैसर्स ए टू जेड इंटरप्राइजेज को एक गरीब व अशिक्षित व्यक्ति के नाम से जीएसटी में पंजीकृत करवाया था। संजय ने उक्त व्यक्ति को झांसे में लेकर उसके पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि दस्तावेज हासिल किए। इसके बाद इन दस्तावेजों का इस्तेमाल फर्म का पंजीकरण और बैंक में चालू खाता खुलवाने में किया।
उन्होंने बताया कि इस फर्म द्वारा फर्जी रूप से उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्यों में कई व्यक्तियों व फर्मों को बोगस इनवॉयस बिना किसी माल की सप्लाई के दे दिए, जिन पर उन्होंने इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लिया।
आरोपी कंपनी संचालक की गिरफ्तारी के लिए धारा 69 के तहत निर्देश दिए गए। इस पर पुलिस ने संजय निगम को गिरफ्तार करके स्पेशल सीजेएम के न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेजने के आदेश दिए गए।
सीजीएसटी अधिकारियों ने बताया कि जिन फर्मों ने ऐसे बोगस टैक्स इनवॉयस को खरीदा है, उनके खिलाफ भी जीएसटी रिकवरी के लिए जांच शुरू कर दी गई है। इसके अलावा संजय निगम के साथियों और सहयोगियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। उनके खिलाफ भी जीएसटी अधिनियम के तहत कार्यवाही की जाएगी।
सीजीएसटी की इस कार्रवाई के बाद बोगस कंपनियां संचालित करने वाले व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। पिछले दिनों एक तेल व्यवसायी के यहां छापे पड़े थे। इस दौरान जीएसटी अधिकारियों ने कई बोगस कंपनियों का संचालन करते हुए पाया गया था। करो़ड़ों की कर चोरी भी पकड़ी गई थी।