निर्दलीय प्रत्याशियों के माननीय बनने के सपने को लोकसभा सीट पर हकीकत के पंख नहीं लग सके। चुनाव मैदान में उतरने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों को क्षेत्र के मतदाताओं ने नकार दिया। चुनाव मैदान में उतरने वाले पांच निर्दलीय प्रत्याशियों के हिस्से में मात्र 1.10 प्रतिशत वोट आए।
राजनीतिक दलों से टिकट न मिलने पर नेताओं के निर्दलीय चुनाव मैदान में ताल ठोंकने की चाहत आजादी के बाद पहले लोकसभा चुनाव से शुरू हो गई। हालांकि यह अलग बात है कि अब तक 17 लोकसभा चुनाव में एटा सीट से कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर देश की संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सका।
लोकसभा चुनाव 2019 में एटा सीट से पांच प्रत्याशियों ने निर्दलीय अपनी किस्मत अजमाई। इन प्रत्याशियों मे से कोई भी प्रत्याशी विजेता उपविजेता प्रत्याशी के सामने अपनी चुनौती पेश नहीं कर सका।