बिल्डर को बताया गया कि उसका पति फौज में है। बिल्डर वहां पहुंचा तो महिला उससे रोमांस की बातें करनी लगी और उसके कपड़े उतरवा लिए। इसी बीच धोखे से वीडियो बना लिया। तभी फौजी वर्दी में युवक आशीष महिला का पति बनकर पहुंच गया।
पीछे से दोनों सिपाही आ गए। बिल्डर को पहले पीटा। फिर थाने ले जाने की धमकी देकर 10 लाख रुपये मांगे। तभी शोर सुनकर आए लोगों ने मकान को घेर लिया। वहां महिला का एक कथित भाई गौरव भी मौजूद था। लोगों ने पुलिस को बुलाकर आरोपियों को सौंप दिया।
सीओ सदर उदयराज सिंह ने बताया कि दोनों सिपाहियों सहित पांचों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। बता दें कि गिरोह के सदस्य आगरा के कारोबारियों का फेसबुक एकाउंट देखते थे।
महिला सदस्य उनके मैसेंजर पर बात करती थी। अपना मोबाइल नंबर देती थी। फोन आते ही मीठी बातों के जाल में फंसाती थी और मकान पर ले जाती थी। वहां रोमांस की बातें कर कपड़े उतरवा लेती थी और वीडियो बनवा लेती थी। इसके बाद बदनामी का भय दिखाकर सिपाही वसूली करते थे।
रैकेट की महिला सदस्य वसूली के लिए बड़े कारोबारियों को फंसाती थी। उनसे फेसबुक पर दोस्ती करती थी। फिर रोमांस की बातें कर मकान पर बुला लेती थी। वहां उसे बेडरूम में ले जाकर उसकी वीडियो बना लेती थी। इसके बाद सिपाहियों के आते ही दुष्कर्म का केस दर्ज कराने की बात कहती थी।
इसी रैकेट ने 31 दिसंबर 2018 को ताजगंज के रहने वाले इंजीनियर के बेटे से 50 हजार रुपये वसूले। वो भी गिरोह की महिला सदस्य के जाल में फंस गया था। उसने अभी शिकायत नहीं की है। पुलिस उसके बारे में जानकारी जुटा रही है।
महिला सदस्य पहले रोमांस की बातें करती थी। कारोबारी को बेडरूम में ले जाती थी। वहां अश्लील बातें करने लगती थी, बीयर की बोतल खोल लेती थी। दोनों बीयर पीते थे। इसके बाद कारोबारी के कपड़े उतरवाए जाते थे।
वहां कैमरा पहले से लगा होता था। वीडियो बनते ही महिला सदस्य शोर मचा देती थी। तुरंत ही उसका पति बनकर गिरोह का दूसरा सदस्य प्रवेश करता था। वो कारोबारी को पीटता था। इसके बाद पुलिस के नाम पर सिपाहियों को फोन किया जाता था।
सिपाही के आते ही महिला दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कहती थी। सिपाही भी कारोबारी को पीटते थे। इसके बाद कहते थे कि अगर पैसा खर्च करे तो समझौता हो सकता है। जाल में फंसा कारोबारी कहीं से इंतजाम करके पैसा दे देता था।
ताजगंज में हिरासत में लिए गए सिपाही कई सालों से ब्लैकमेलिंग का रैकेट चला रहे थे। अभी तक कम से कम 20 लोगों को शिकार बना चुके थे। इसकी जानकारी इनसे पूछताछ में चली है। इनकी करतूत का खुलासा होने पर और भी शिकायतें आ सकती हैं। लोग बदनामी के डर से चुपचाप पैसे दे देते थे।
रैकेट के सदस्य किसी कारोबारी से वसूली होते ही रकम का बंटवारा करते थे। 60 फीसदी हिस्सा दोनों सिपाहियों में बंटता था। शेष रकम के तीन हिस्से बनते थे। रैकेट की महिला सदस्य शादीशुदा है। पति से अलग रहती है। खुद को फौजी और उसका पति बताने वाला युवक भी अच्छा खासा हिस्सा लेता था।
सबसे कम पैसा उस युवक को मिलता था, जिसे महिला सदस्य अपना भाई बता रही है। पुलिस को उम्मीद है कि गिरोह से पूछताछ में कई और खुलासे हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपी आशीष शर्मा, इंद्रापुरम सदर का रहने वाला है। ब्लैकमेलिंग का प्लान वही तैयार करता था।
महिला मूल रूप से रकाबगंज क्षेत्र की रहने वाली है। पति से अलग रहती है। रकाबगंज का ही गौरव गिरोह का सदस्य है। महिला उसे अपना भाई बताती है। आशीष पहले चोरी के मामले में जेल जा चुका है। वह महिला सदस्य को अपनी गर्लफ्रेंड बता रहा है।
वसूली की किश्त भी चुका रहे कारोबारी
कमला नगर के दो कारोबारी ऐसे रहे जो मांगी गई पूरी रकम नहीं दे पाए। उनसे दो दो लाख मांगे गए थे। दोनों एक ही दिन जाल में फंसे थे। उन्होंने एक एक लाख दे दिए। शेष रकम दस दस हजार की किश्तों से चुका रहे थे। कई लोगों से उनकी हैसियत देखकर पचास हजार रुपये ही लिए गए। कुछ ऐसे रहे जिनसे दस लाख तक मांगे गए।
पहले भी लग चुकेवर्दी पर दाग
- पिछले साल रिफाइंड कारोबारी से 15 लाख की लूट में दो सिपाही जेल गए।
- पिछले साल ही सिकंदरा थाना में हुई राजू गुप्ता की हत्या में दरोगा अनुज सिरोही जेल गया।
- पिछले साल रिश्वत और वसूली के आरोप में कई सिपाही निलंबित और लाइन हाजिर किए गए।