आगरा में 2012 के मारपीट के मामले में गवाहों के बयानों में विरोधाभास और डॉक्टर की गवाही के बाद अदालत ने पांच आरोपियों को बरी कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि घायल को मारपीट नहीं बल्कि दुर्घटना में चोट लगी थी।
आगरा में मारपीट कर घातक चोट पहुंचाने के केस में अदालत में सुनवाई हुई। गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास देखने को मिला। डॉक्टर ने कहा कि पीड़ित को हादसे में चोट लगी। तब अस्पताल में भर्ती हुआ था। बुधवार को एडीजे 21 विराट श्रीवास्तव ने पांच आरोपियों को बरी कर दिया।
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थाना एत्माद्दौला में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार सिंधी ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि 30 मई 2012 को वह टेढ़ी बगिया स्थित कालिंदी विहार में ममिया सास रज्जावती के घर गए थे। वहां रात 10 बजे एत्माद्दौला थाना क्षेत्र के कांशीराम आवास योजना निवासी आरोपी पिंटू, बल्ले, सोनू, जगदीश उर्फ जग्गो और सोनू वहां आ गए। गाली-गलौज करने लगे। विरोध पर उन्हें और नीरज को पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
ममिया सास, उनके पुत्र पंकज और केशव बचाने आए तो आरोपियों ने उन्हें भी पीटा। मुकदमे के विचारण के दौरान गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास देखने को मिला। डॉक्टर एसएन गुप्ता ने अदालत में कहा कि घायल नीरज को दुर्घटना में घायल होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।