सूखा तालाब होने के बावजूद दिया विभाग ने सम्मान का प्रमाणपत्र
- फोटो : अमर उजाला
किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की जयंती 23 दिसंबर को प्रगतिशील किसानों को सम्मानित कराना था। इसके चलते मत्स्य विभाग ने जल्दबाजी में मछली पालन करने वाले आठ किसानों की सूची जारी कर उनका सम्मान करा दिया। जबकि तालाब सूखे पड़े हैं न उनमें पानी है और न मछलियां।
विभाग ने सम्मानित होने वाले किसानों की सूची कार्यालय में ही बैठकर बना डाली। जब अमर उजाला टीम ने इसकी पड़ताल की तो हकीकत कुछ और ही निकली। जिले में 117 से ज्यादा मछली पालक हैं। ऐसे में विभाग ने मछली पालन के उत्पादन का रिकॉर्ड चेक किए बिना ही सूची तैयार कर सीडीओ अजय प्रकाश से सत्यापित करा ली।
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फोन आया तो पहुंच गए सम्मान लेने
विकास खंड मारहरा के गांव ख्वाजगीपुर निवासी सुरेश चंद्र पुत्र नाथूराम मत्स्य पालक हैं। इनसे जब मछली उत्पादन के संबंध में पूछा गया तो बताया कि हमारे पास तो मत्स्य विभाग से फोन आया था कि आपका नाम सम्मान लेने के लिए सूची में आया है। आपको सम्मान समारोह पर पहुंचना है। उन्होंने बताया कि मत्स्य अधिकारी ने कभी मछली उत्पादन का रिकॉर्ड चेक नहीं किया।
मत्स्य विभाग के सम्मान के साथ महिला और सूखा तालाब
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गांव बीगौर में सूखा पड़ा तालाब
विकास खंड सकीट के गांव बीगौर में रंगोली देवी पत्नी अजय कुमार के पास पट्टे का तालाब है। जहां मछली पाली जाती हैं। जब तालाब को देखा गया तो वह सूखा पड़ा था। जबकि रंगोली देवी का दावा है कि इस बार 30 क्विंटल मछली का उत्पादन किया गया है।
तीसरी बार मिला पुरस्कार
विकास खंड सकीट के गांव इशारा पश्चिमी के मत्स्य पालक कमला देवी पत्नी सुरेश चंद्र ने बताया कि मत्स्य पालन में तीसरी बार सम्मानित किया है। मौके पर उनके तालाब में मछलियां नहीं थीं। जबकि वह भी कर रहीं हैं कि 26 क्विंटल मछली का उत्पादन किया गया।
प्रथम स्थान वाले को दिए गए सात हजार रुपये
जिला स्तर पर प्रथम स्थान पाने वाले प्रगतिशील किसान को सात हजार और दूसरा स्थान पाने वाले किसान को पांच हजार रुपये की धनराशि के साथ एक प्रशस्तिपत्र और शील्ड प्रदान की गई थी।
इंस्पेक्टर आशीष और अनुज ने जिन आठ मत्स्य पालकों की सूची उपलब्ध कराई थी, उसी को मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर मत्स्य पालकों का सम्मान कराया गया था। - राजेलाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य