रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष अभिषेक कुमार पचौरी ने कहा कि 150 साल पुरानी नगर रामलीला के मंचन की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। जबकि नगर रामलीला महोत्सव मंच के साथ ही खुले मैदान में होता है। वहीं मुख्यमंत्री की सभा के लिए पांच हजार लोगों की इजाजत दे दी गई। क्या इस भीड़ से कोरोना नहीं होगा।
स्थानीय निवासी पुष्पेंद्र उपाध्याय ने कहा कि जनसभा में हजारों की भीड़ के आने के बाद भी कोरोना से लोग संक्रमित नहीं होंगे तो रामलीला में मात्र दो सौ लोग कैसे संक्रमित हो जाते। सरकार ने रामलीला की अनुमति नहीं दी, लेकिन चुनावी सभाएं बदस्तूर जारी हैं।
मयंक श्रीवास्तव ने कहा कि रामलीला और दुर्गा पूजा हिंदू धर्म में आस्था से जुड़े पर्व हैं। सरकार द्वारा कहीं तो अनुमति दी गई तो कहीं अनुमति नहीं दी है। टूंडला नगर रामलीला में मात्र दो सौ लोगों की अनुमति मांगी गई थी जिसे नहीं दिया गया। परंतु मुख्यमंत्री की सभा में हजारों लोगों की भीड़ आई और सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ीं। यह दोहरा मापदंड है।
स्थानीय निवासी डीपी सिंह ने कहा कि रामलीला के लिए अनुमति न देना हजारों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया। मात्र दो सौ दर्शकों के साथ रामलीला कमेटी ने अनुमति मांगी थी। जिसे जिलाधिकारी द्वारा शासनादेश के अनुसार स्वीकार नहीं किया। जिससे हजारों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची।
टूंडला के उपजिलाधिकारी राकेश कुमार वर्मा ने कहा कि जनसभाओं के लिए गाइडलाइन जारी हुई हैं, जिनमें मैदान की क्षमता के आधी संख्या में सभा की जा सकती है। गाइडलाइन के तहत ही मुख्यमंत्री की चुनावी जनसभा हुई है।