बीएसएफ के प्लाटून कमांडर विजेंद्र सिंह यादव
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संदिग्ध हालात में जान गंवाने वाले गुवाहाटी में तैनात बीएसएफ के प्लाटून कमांडर विजेंद्र सिंह यादव अपने पीछे कई सवाल छोड़ गए। उनकी मौत कैसे हुई, यह जानने के लिए परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मंगलवार को पांच घंटे तक हंगामा किया। दोपहर बाद एक बजे परिजनों की बीएसएफ मुख्यालय से बात कराई गई जिसमें जांच पर सहमति बनने के बाद गांव जलोपुरा में उनका अंतिम संस्कार हो सका।
मालूम रहे कि 28 मई की सुबह बीएसएफ के प्लाटून कमांडर विजेंद्र सिंह की गोली लगने मौत हो गई थी। उनकी मौत गुवाहाटी स्थित बीएसएफ के कैंप में उनके आवास पर हुई। रविवार को सुबह साढे़ नौ बजे उनके पैतृक गांव जलोपुरा स्थित आवास पर मौत की सूचना दी गई। सोमवार दोपहर उनका शव गुवाहाटी से दिल्ली लाया गया।
इसके बाद बीएसएफ के जवानों की टुकड़ी शव को सड़क मार्ग से एक बजे रात में टूंडला थाने लेकर आई। टूंडला थाने से शव को मंगलवार सुबह आठ बजे जलोपुरा गांव लाया गया। गम के बीच परिजनों का आक्रोश भी उभर कर सामने आया और ग्रामीणों के साथ मिलकर उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए शव नहीं उठने दिया। परिजन इसे हत्या करार दे रहे थे और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे थे।
इस मौके पर विजेंद्र सिंह को शहीद का दर्जा देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की भी मांग उठी। सूचना पर डीएम नेहा शर्मा और एसएसपी अजय कुमार गांव पहुंचे। एडीएम ने गुवाहाटी स्थित बीएसएफ मुख्यालय पर फोन कर अधिकारियों से परिवारीजनों की बात कराई। इसके बाद परिवारीजन शव का अंतिम संस्कार कराने को तैयार हुए।