सन्न रह गए शहर की सबसे पाश कालोनी के बाशिंदे
रहस्य
1- संजीव रस्तोगी अपने ड्राइवर के साथ पहुंचे थे राजकुमार लालवानी के घर।
2- उन्होंने कालोनी के रजिस्टर में अपना नाम गागा भाई दर्ज कराया ।
3- वह राजकुमार के घर अक्सर आते रहते थे, रविवार की दोपहर भी आए थे।
दोपहर के 12:40 बजे थे। भरतपुर हाउस में सन्नाटा था। 15-15 मिनट के अंतराल पर इक्का दुक्का लोग आ जा रहे थे। तभी अचानक राजकुमार ललवानी की कोठी में शोर सुनाई दिया। आस पास के लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कोई जोर से चीख रहा था। लेकिन ये क्या? अगले ही पल धांय धांय गोलियां चलने लगीं। पूरी कालोनी सन्न रह गई। पता चला फायरिंग राजकुमार की कोठी में हुई है। सभी लोग उधर दौड़ लिए। मंजर दिल दहलाने वाला था। मेन गेट पर खून से लथपथ संजीव रस्तोगी पड़े थे। उन्हें कालोनी के कई लोग जानते हैं। अक्सर राजकुमार के पास आते रहते हैं। रविवार को भी आए थे। उनके पास ही राजकुमार फर्श पर पड़े थे। उनके सिर से खून निकल रहा था। पूरा फर्श खून से रंग गया था। उनकी पत्नी निर्मला चीख रहीं थी। संजीव का ड्राइवर उन्हें लेकर जीजी नर्सिंग होम के लिए भागा। पड़ोसियों ने राजकुमार को उठाया और पुष्पांजलि नर्सिंग होमे लेकर चले। इसके थोड़ी देर बाद पुलिस पहुंच गई। किसी ने फोन पर सूचना दी थी। तब तक सैंकड़ों लोग जमा हो चुके थे। हर चेहरा हैरान नजर आ रहा था। सवाल ही सवाल थे। गोली कैसे चली? किसने चलाई? झगड़ा किस बात पर हुआ? मौके पर रिवाल्वर भी पड़ा था। इसे किसी ने उठाकर कार के बोनट पर रख दिया।
कब कब क्या क्या
12:35 - संजीव रस्तोगी ने भरतपुर हाउस के गेट नंबर एक के रजिस्टर में एंट्री कराई।
12: 45 - राजकुमार लालवानी की कोठी में फायरिंग की गई।
1: 05 - पुलिस भरतपुर हाउस पहुंची, घटना के बारे में पूछताछ शुरू की।
1:45 - फील्ड यूनिट पहुंची, फोरेंसिक साक्ष्य जुटाना शुरू किया।
2:45 - पुष्पांजलि नर्सिंग होम में राजकुमार को मृत घोषित किया गया।
3:05 - फील्ड यूनिट को फिर से बुलाया गया, इस बार विस्तृत जांच की।
गोलीकांड के पीछे करोड़ों का लेन देन
आगरा। भरतपुर हाउस में हुए गोलीकांड के पीछे करोड़ों के लेन देन का विवाद बताया जा रहा है। पुलिस यह मालूम करने में लगी है कि राजकुमार लालवानी और संजीव रस्तौगी में से किस पर किसका कितना पैसा था? कालोनी के लोगों ने बताया कि काफी दिन से यह चर्चा चल रही है कि गागा भाई एमसीएक्स का बड़ा कारोबारी है। लालवानी और रस्तौगी उसके पास एमसीएक्स में करोड़ों रूपया लगाते हैं। इसी के चलते दोनों में विवाद हुआ। पहले यह पांच करोड़ का विवाद बताया जाता था लेकिन बाद में कुछ लोग इसे दस करोड़ का बताने लगे। हालांकि सच्चाई या तो राजकुमार जानते थे या फिर संजीव को पता है। उनके परिवार को भी इसकी जानकारी नहीं है। राजकुमार के बेटे दीपक का कहना है कि उन्हें सिर्फ इतना पता है कि पापा को रस्तोगी अंकल से पैसे लेने थे। कितने पैसे थे, यह जानकारी नहीं। उधर, रस्तोगी के बेेटे सनी का कहना है कि उन्हें विवाद की पूरी जानकारी नहीं। पापा के राजकुमार अंकल पर पैसे थे, बस इतना पता है।
गागा भाई से भी होगी पूछताछ
पुलिस का कहना है कि इस मामले की तह तक जाने के लिए एमसीएक्स कारोबारी गागा भाई से भी पूछताछ की जाएगी। संजीव भरतपुर हाउस कालोनी के रजिस्टर में अपने नाम की जगह गागा भाई का नाम दर्ज कराते थे।
चार गोलियां - तीन कहानियां
घटनाक्रम की सही जानकारी नहीं, अंदाजा लगा रही पुलिस
फोरेंसिक जांच
- बेडरूम की अलमारी खुली थी, इससे फिंगर प्रिंट मिले हैं, माना जा रहा है कि रिवाल्वर यहीं से निकाला गया।
- ड्राइंग रूम की दीवार एक निशान मिला है, माना जा रहा है कि यह गोली लगने से बना।
- रिवाल्वर कार के बोनट पर रखा मिला, माना जा रहा है कि इसे फर्श से उठाकर रखा गया।
अनुमान - 1
क्राइम डिटेक्शन के स्पेशलिस्ट से लेकर फोरेंसिक इंवेजिस्टेशन के एक्सपर्ट तक ने क्राइम सीन पर चार घंटे माथापच्ची की लेकिन यह साफ नहीं कर पाए कि घटना का क्रम क्या रहा? मतलब किसने किस पर गोली चलाई? तमाम साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम का अनुमान लगाया जा रहा है। इसमें तीन कहानियां बनी हैं। सबसे ज्यादा संभावना यह लग रही है कि राजकुमार लालवानी उर्फ राजू ने पहले तीन गोलियां चलाई। इनमें से दो संजीव रस्तोगी की पीठ पर लगीं। इसकेबाद उन्होेंने एक गोली अपनी कनपटी पर मारी। इसके ही सबसे ज्यादा साक्ष्य मिले हैं। हालांकि यह सिर्फ अनुमान है। न तो घटना का कोई चश्मदीद है। न ही वारदात कैमरे में कैद हो पाई है। पुलिस के अनुमान का आधार यह है कि चार गोलियां चलीं, इतनी ही गोलियां राजू के रिवाल्वर की मैगजीन से गायब हैं। छह में से दो गोलियां मिली हैं। मौके पर एक ही तरह के चार खोखे मिले हैं। माना जा रहा है कि चारों गोलियां राजू के रिवाल्वर से चलाई गई हैं। दूसरा, रिवाल्वर उनका था, इसलिए गोली उन्होंने ही चलाई होगी। तीसरा, संजीव की पीठ में गोली लगी हैं। उन्हें भागते हुए गोली मारी गई होगी। पहले दोनों के बीच ड्राइंग रूम में झगड़ा हुआ होगा। संजीव उठकर चल दिए होंगे। गुस्से में राजू ने रिवाल्वर से तड़ातड़ तीन गोलियां चला दी होंगी। संजीव के गिरते ही उन्हें डर लगा होगा, ग्लानि आई होगी। इसी के चलते उन्होंने एक गोली अपनी कनपटी पर मार ली होगी। वे राइट हेंडर थे, गोली भी कनपटी पर दाहिनी ओर लगी है। रिवाल्वर उनके पास पड़ा मिला।
अनुमान - 2
दूसरा अनुमान यह है कि पहले राजू ने संजीव की पीठ पर दो गोलियां मारीं। इसके बाद घायल अवस्था में संजीव ने उनसे रिवाल्वर छीनकर उनकी कनपटी पर गोली मार दी। इसके बाद रिवाल्वर उनके पास रख दिया।
अनुमान - 3
संजीव ने राजू का रिवाल्वर छीनकर उनकी कनपटी पर गोली मारी। इसके बाद क्रास केस बनाने के लिए ड्राइवर रवि से कहकर अपनी पीठ पर दो गोलियां चलवाई। उसने ही रिवाल्वर कार के बोनट पर रखा।
वर्जन
घटना का सही क्रम अभी स्पष्ट नहीं है, क्राइम सीन के हिसाब से सिर्फ अनुमान लगाए जा रहे हैं - सुशील घुले ( एसपी सिटी )
समाज के लिए समर्पित रहा राजकुमार का जीवन
भरतपुर हाउस गोलीकांड में जान गंवाने वाले जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी उर्फ राजू का जीवन समाज के लिए समर्पित रहा। वे सिंधी समाज के कार्यक्रमों में बढ़कर हिस्सा लेते थे। झूलेलाल जयंती पर मेला कमेटी में अहम पदों पर रहे। इसके अलावा चिकित्सा शिविरों और निर्धन कन्याओं के सामुहिक विवाह में उनका योगदान रहता था। उनके निधन की सूचना मिलते ही सेंट्रल सिंधी पंचायत के अध्यक्ष जीवतराम कलीरा, महामंत्री गागनदास रमानी, संक्षक श्याम भोजवानी और हेमंत भोजवानी उनके घर पहुंचे। वहां से पोस्टमार्टम हाउस गए। श्याम भोजवानी ने बताया कि राजकुमार धार्मिक प्रवृति के थे। समाज के कार्यो में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सिंधी समाज के पदाधिकारी आज मंगलवार को एसएसपी से मिलेंगे। उधर, भरतपुर हाउस के लोगों ने बताया कि राजकुमार पहले बिल्लोचपुरा में रहते थे। उनका बीड़ी का काम था। इसके बाद उन्होंने संगम गुटका बनाया। यह राजस्थान में खूब चलता था। इसी में कामयाबी के बाद उन्होंने आठ साल पहले जूता सोल की फैक्ट्री लगाई। कुछ समय पहले ही अपनी बेटी सीमा की शादी अहमदाबाद से की। बेटे दीपक की भी शादी मंदसौर (मध्य प्रदेश) की वर्षा से हुई है। वह मायके गई हुई है। राजकुमार अपने पांच भाइयों में तीसरे नंबर के थे। उनके भाई अशोक, बंसी, सुंदर की तोता का ताल पर दुकान है। सबसे छोटे भाई रूप किशोर पाली में रहते हैं।
घर में मचा कोहराम
दोपहर पौने तीन बजे जैसे ही पुष्पांजलि नर्सिंग होम के डाक्टरों ने बताया कि राजकुमार नहीं रहे, वैसे ही उनके भाई फूट फूटकर रोने लगे। उनकी मां का रो रोकर बुरा हाल हो गया। उनकी पत्नी निर्मला उनकेसाथ ही थी। वे आईसीयू से बाहर आई तो आंखों से आंसू गिर रहे थे। घर पर खबर पहुंची तो कोहराम मच गया।
जान लेने के लिए इस्तेमाल हो रहे लाइसेंसी हथियार
केस - 1
आठ महीने पहले लायर्स कालोनी में रिटायर्ड आरटीओ ने लाइसेंसी राइफल से अपनी पत्नी की हत्या कर खुदकुशी कर ली थी।
केस - 2
ढाई माह पहले सदर में अलीगढ़ के युवक ने लाइसेंसी रिवाल्वर से अपनी मंगेतर की हत्या करने के बाद गोली मारकर सुसाइड कर लिया था।
केस - 3
भावना एस्टेट में 19 जून को आरएसएस के पूर्व नगर प्रचारक अजीत को लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारी गई। आरोप संघ के स्वयंसेवक पर ही है।
ये घटनाएं तो बानगी भर हैं। तमाम ऐसे मामले हैं जिनमें लाइसेंसी असलाह का इस्तेमाल जान लेने के लिए किया गया है। हैरानी तब और बढ़ जाती है जब ऐसी घटनाएं पाश कालोनियों के पढ़े लिखे परिवारों में होती हैं। भरतपुर हाउस में ऐसी ही वारदात हुई है।
जनपद में 45 हजार लाइसेंसी असलाह हैं। लंबे समय से एक भी ऐसा मामला नहीं आया जिनमें इनका इस्तेमाल आत्मरक्षा के लिए किया गया हो। अपराधियों से मुकाबले के लिए भी लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल नहीं किए गए हैं। पिछले दो साल की बात करें तो 95 फीसदी घटनाएं हत्या और आत्महत्या की हैं। कमला नगर में पूर्व सपा नेता मनोज अग्रवाल ने लाइसेंसी रिवाल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या का प्रयास किया था। बड़ी मुश्किल से बची थी उनकी जान।
इन असलाह से देहात में एक दो बार बदमाशों के आने पर उन्हें भगाने के लिए हवाई फायर जरूर किए गए हैं। इनके अलावा तमाम घटनाएं हर्ष फायरिंग की हैं। पिछले दिनों रुनकता में हर्ष फायरिंग में दो लोग घायल हुए एथ। जबकि इन असलाह के लाइसेंस मांगे जाते हैं जान खतरे में बताकर आत्मरक्षा के लिए।
- हमें नहीं मालूम है कि घटना की वजह क्या रही। यही पता चला है कि भइया को गोली मारी गई - सुन्दर लालवानी ( राजकुमार के भाई )
- पापा यही कहते थे कि संजीव रस्तोगी से पैसे लेने हैं, इसके अलावा कोई जानकारी नहीं है - दीपक लालवानी ( राजकुमार के बेटे )
- पापा कुछ बताने की स्थिति में नहीं है, ड्राइवर रवि को भी पूरी जानकारी नहीं है, अभी कुछ नहीं कह सकते हैं - सनी रस्तोगी ( संजीव रस्तोगी का पुत्र)
- मैं गोली चलने की आवाज सुनकर पहुंचा, संजीव घायल पड़े थे, राजकुमार मुझे नजर नहीं आए - रवि ( संजीव का ड्राइवर )
भाई ने दर्ज कराया हत्या का केस
घटना की रिपोर्ट मृतक राजकुमार लालवानी के भाई सुंदर लालवानी ने हरीपर्वत थाना में दर्ज कराई है। इसमें बताया गया है कि राजकुमार की हत्या संजीव रस्तोगी और उनके ड्राइवर रवि ने की। पुलिस ने रवि को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह बार बार एक ही बयान दे रहा है। उसका कहना है कि वह बाहर खड़ा था, गोली चलने की आवाज सुनकर अंदर पहुंचा।