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आगरा: फर्जी किरायेनामे पर दिया बिजली कनेक्शन, फंस गए टोरेंट पावर के अधिकारी; कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज

Sat, 29 Aug 2026 06:01 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आगरा में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बिजली कनेक्शन देने पर टोरेंट पावर के अधिकारियों की मुश्किल बढ़ गई है। कोर्ट के आदेश पर बिजली कंपनी के अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
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Fir demo - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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आगरा के न्यू आगरा थाने में मकान के हिस्से पर अवैध कब्जा करने के लिए फर्जी किरायानामा और अन्य दस्तावेज तैयार कर बिजली कनेक्शन जारी कराने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। मकान मालिक दिनेश कालरा की शिकायत पर नवीन पालीवाल, गौरव पालीवाल, टोरंट पावर के महाप्रबंधक संजय सिंह और सहायक महाप्रबंधक पीयूष कुमार सिन्हा को आरोपी बनाया गया है।
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शिकायतकर्ता न्यू आगरा निवासी दिनेश कालरा ने न्यायालय के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि वैभव कुंज निवासी नवीन पालीवाल, उनके भाई गौरव पालीवाल ने मकान के हिस्से पर कब्जे के इरादे से 15 अप्रैल 2014 का कूटरचित किरायानामा तैयार किया। दस्तावेज में वादी के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। परिवार के सदस्यों की तस्वीरों का भी दुरुपयोग किया। इन्हीं कागजातों के आधार पर टोरंट पावर से बिजली कनेक्शन लेने का आवेदन किया।

 
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सात अप्रैल 2015 को टोरंट पावर के अधिकारियों को लिखित रूप से सूचित किया। बताया कि किराया अनुबंध समाप्त हो गया है। आरोपियों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी हैं। इसके बावजूद वर्ष 2015 में नोटिस जारी होने के बाद बिजली कनेक्शन दे दिया गया। कालरा ने टोरंट पावर के महाप्रबंधक संजय सिंह और सहायक महाप्रबंधक पीयूष कुमार सिन्हा पर भी कार्रवाई में मिलीभगत का आरोप लगाकर नामजद किया है।

दिनेश कालरा का आरोप है कि सरकारी विभागों में जमा कराए दस्तावेज जिला निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट में गलत पाए गए हैं। 14 मई 2026 को पुलिस के उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 27 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज हुई। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। महाप्रबंधक संजय सिंह की ओर से बताया गया कि उपभोक्ता को नया कनेक्शन नियमानुसार सामान्य प्रक्रिया के तहत दिया जाता है। पर्याप्त दस्तावेज जो अनिवार्य हैं, उन्हें देखकर के ही नए कनेक्शन की आगे की प्रक्रिया की जाती है। इसके बाद सर्वे किया जाता है। उपभोक्ता की उपस्थिति देखी जाती है। इसके बाद ही कनेक्शन की प्रक्रिया लागू की जाती है। इस मामले में शिकायत के बाद दो महीने में कनेक्शन काट दिया गया।
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