आगरा में डीआरएम कार्यालय परिसर में आरपीएफ जवान से मारपीट, जातिसूचक शब्द कहने और मोबाइल-चेन छीनने के आरोप में स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का मामला सामने आया है। जवान के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत पर केस दर्ज नहीं किया था, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
आगरा में आरपीएफ के सिपाही हरेश प्रताप सिंह ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें बताया कि 14 जुलाई को डीआरएम कार्यालय परिसर में स्टेशन अधीक्षकों सहित अन्य लोगों ने धरना प्रदर्शन किया था। इस दौरान डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर व प्रदर्शन कारियों का आरपीएफ जवान हरेश प्रताप से विवाद हो गया था।
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जवान कहना है कि उन्हें उच्च अधिकारियों ने आदेश दिया था कि वह प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने वालों की वीडियोग्राफी कर लें। इस पर वो सिविल कपड़ों में पहुंच गए थे। नरेंद्र सिंह चाहर अपने साथियों के साथ आए। नाम पूछने लगे। उन्होंने अपना परिचय दिया। यह सुनकर उन्होंने गाली देना शुरू कर दिया। विरोध पर जातिसूचक शब्द बोले। बाद में मारपीट भी की।
इस दौरान 40 हजार कीमत का मोबाइल, ढाई लाख कीमत की चेन और पहचान पत्र छीन लिया। कुछ लोगों के आने पर छोड़ा। जातिसूचक शब्द बोलने के बाद धमकी दी कि किसी से शिकायत की तो छोड़ेंगे नहीं। पुलिस ने मेडिकल कराया लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इस पर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया।