दयालबाग शैक्षिक संस्थान की शोध छात्रा की हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत में अंतिम बहस शुरू हो गई है। अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं, जबकि अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
बहुचर्चित दयालबाग शैक्षिक संस्थान (डीईआई) की शोध छात्रा हत्याकांड के मामले में बृहस्पतिवार को बहस शुरू हो गई। अपर जिला जज प्रथम पुष्कर उपाध्याय की अदालत में अभियोजन एवं वादी पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक एवं पूर्व डीजीसी ने बहस कर दलीलें पेश कीं। वहीं आरोपी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने तर्क प्रस्त़ुत किए। 23 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।
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घटना 15 मार्च, 2013 की है। डीईआई की नैनो बायोटेक्नोलॉजी लैब में शोध छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने उदय स्वरूप और लैब टेक्नीशियन यशवीर संधू को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई, जिसने अपनी विवेचना में केवल उदय स्वरूप को आरोपी बनाया।
अब तक अभियोजन पक्ष के चार दर्जन से अधिक गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। बचाव पक्ष की ओर से भी पांच गवाहों की गवाही कराई गई, जिनमें लंदन (इंग्लैंड) निवासी फोरेंसिक डीएनए विशेषज्ञ डॉ. एंडेरी सेमिकोस्की की गवाही हुई। वादी पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने सभी बचाव गवाहों से जिरह की। फिलहाल वादी पक्ष की अंतिम बहस जारी है। इसके बाद आरोपी पक्ष के अधिवक्ता अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखेंगे। बृहस्पतिवार को को सुनवाई के दौरान वादी के अलावा आरोपी उदय स्वरूप और यशवीर संधू भी अदालत में मौजूद रहे। संवाद