ताज लिटरेचर फेस्टिवल में प्रख्यात फिल्मकार मुजफ्फर अली के साथ रिद्धिमा ने गंगा जमुनी तहजीब पर चर्चा की। मुजफ्फर अली ने कहा कि आगरा गंगा जमुनी अदब का मरकज है। कल्चर, क्राफ्ट और टूरिज्म के इस सेंटर में नजीर, मीर और गालिब इसके खंभे हैं। आगरा की गली-कूंचों में पैदा हुई शायरी आम आदमी की शायरी है। गंगा और यमुना को धार्मिक आस्था से जोड़ना ही काफी नहीं है। गोमती लखनऊ की सभ्यता को दिखाती है तो यमुना ब्रज की संस्कृति को। दरियाएं सभ्यता हैं। दरियाओं को प्रदूषण से दूर रखना सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने वाजिद अली शाह के लखनऊ की बात की। उन्होंने चिश्ती सिलसिले का जिक्र करते हुए अमीर खुसरो की शायरी का जिक्र किया। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के सवाल पर कहा कि ये परवरिश की बात है। बच्चों को अदब की सीख बचपन से सिखानी होगी। कोई भी अदब किसी को हिंदुस्तानियत से दूर होने की वकालत नहीं करता। सिनेमा को समझने के लिए वैश्विक सोच पैदा करनी होगी। हमें भी अमेरिका और हालीवुुड की तरह संदेश देने वाली फिल्मों पर ध्यान देना होगा। मुजफ्फर अली ने कहा कि वे एक ऐसा इंस्टीट्यूट बनाना चाहते हैं, जहां बच्चों को फिल्मों के जरिये सोचना सिखाया जाए।
दर्द जिंदगी जीना सिखाता है : अनूप जलोटा
जाने माने भजन गायक अनूप जलोटा की किताब हार्ट फेल्ट पर प्रसिद्ध आलोचक भारती प्रधान के साथ चर्चा की। अनूप जलोटा ने इस किताब को अपनी पत्नी मेधा के असाध्य बीमारी से संघर्ष को दर्शाया है। जलोटा ने हुस्न को चांद, जवानी को कंवल कहते हैं, उनकी सूरत नजर आए तो गजल कहते हैं, सुनाकर शुरुआत की। अपनी किताब का जिक्र करते हुए कहा कि ‘गैर को दर्द सुनाने की जरूरत क्या है, अपने झगड़े में जमाने की जरूरत क्या है।’ वर्ष 2000 में पत्नी मेधा को दिल की गंभीर बीमारी का पता चला। इसके बाद 15 साल तक उन्होंने पत्नी की हर सांस को बचाने के लिए क्या-क्या किया। किताब में यही सब संजोया है। अनूप ने बताया कि मेधा को असाध्य बीमारी होने के बाद भी हम दोनों ने हर पल को खुशी से जिया। दोनों को पता था कि अब मेधा की जिंदगी के दिन बहुत कम हैं, इसके बाद भी कभी दुखी नहीं हुए। उन्होंने बताया कि एक बार तो अमेरिका में इलाज के दौरान वे अपना नाम तक भूल गए। अनूप ने कहा कि किताब में यही संदेश है कि सुख के बारे में सोचो, दुख के बारे में नहीं। उन्होंने मेधा के पसंदीदा भजन अच्युतम केशवम, कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम, जानकी बल्लभम, कौन कहता है कि भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं और ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन प्रस्तुत किए। अपनी किताब के हार्ट फेल्ट के साथ ही लोकेश शर्मा की किताब दी पावर आफ ऑन माइंड का लोकार्पण किया।
जगजीत को समर्पित अलबम जल्द
अनूप जलोटा ने बताया कि गजल गायक स्वर्गीय जगजीत सिंह को श्रद्धांजलि स्वरूप अलबम ‘वी लव यू जगजीत’ जल्द आ रहा है। इसमें उनके साथ सुखविंदर, शान, रिचा ने जगजीत सिंह के नौ गीतों को स्वर दिया है। यू ट्यूब पर भी इसे अपलोड किया जाएगा। इसके अलावा श्रीमद्भागवत गीता को संगीतबद्ध किया है। जल्द ही भागवत गीता का अलबम भी बाजार में आएगा।