चार महीने से शयन कर रहे देव (श्रीहरि विष्णु) 31 अक्तूबर को जागेंगे। कार्तिक शुक्ल की एकादशी के दिन देवों के जागने (देवोत्थान एकादशी) के साथ मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। इस बार सहालग काफी कम हैं। इसलिए देवोत्थान एकादशी के दिन शादियां अधिक हैं।
ज्योतिषाचार्य डा. हरिकृष्ण पाराशर के मुताबिक मान्यता है कि भगवान विष्णु अषाढ़ मास की शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए क्षीर सागर में शयन करते हैं। तब पृथ्वी वासियों को पालन का भार माता लक्ष्मी पर आ जाता है।
भगवान विष्णु के शयन की वजह से सभी मांगलिक कार्य स्थगित हो जाते हैं। कार्तिक शुक्ल की एकादशी को वे जागते हैं तो मांगलिक कार्यों का आगाज होता है। इस दिन तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के श्रीविग्रह (सालिग्राम) के साथ किया जाता है। देवोत्थान पर विष्णु भगवान की पूजा के लिए गन्ने, गेंदा के फूल और सिंघाड़े, शकरकंदी आदि की बिक्री होने लगी है।