बेवर। जिले में संक्रामक बीमारियों पर अंकुश नहीं लग रहा है। शनिवार को बेवर क्षेत्र के गांव मद्दापुर खास निवासी बच्चे की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार उसे एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। हालत बिगड़ने पर वह उसे फर्रुखाबाद ले गए, लेकिन डॉक्टर उसकी जान बचा नहीं सके।
बेवर के गांव मद्दापुर खास निवासी उमेश कुमार के छह वर्षीय पुत्र यशवीर को एक सप्ताह पहले बुखार आ गया था। उपचार के लिए बेवर के एक चिकित्सक के पास ले गए। चिकित्सक ने देखने के बाद दवाएं लिख दीं। तीन दिन तक दवा चलने के बाद भी जब कोई आराम नहीं हुआ तो परिजन उसे फर्रुखाबाद ले गए।
तब से वहां उसका उपचार चल रहा था। उमेश कुमार ने बताया कि शनिवार शाम को उसने दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि गांव निवासी गुड्डू शाक्य के तीन बच्चे, कलक्टर सिंह के दो बच्चे, रामसिंह और राजू समेत कई घरों में लोग बुखार से पीड़ित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही स्वास्थ्य विभाग ने गांव में आकर उपचार न दिया तो और भी लोगों को जान गंवानी पड़ सकती है।
उमेश कुमार ने बुखार आने पर यशवीर का इलाज बेवर के एक झोलाछाप के यहां कराया। झोलाछाप ने बिना किसी जांच के ही बुखार का इलाज शुरू कर दिया। सही उपचार न मिलने के कारण यशवीर सिंह की हालत बिगड़ती चली गई। परिजन जब तक उसे बेहतर उपचार के लिए फर्रुखाबाद ले गए उसकी आंतों में संक्रमण हो चुका था। यहां खून का सैंपल लिया गया और अल्ट्रासाउंड कराया गया। जांच रिपोर्ट आने से पहले ही बच्चे की मौत हो गई।
जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टर अभिषेक दुबे ने बताया कि जांच होने के बाद बच्चे को सही समय पर इलाज मिलता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने बताया कि टायफायड होने पर बुखार आने लगता है। सही समय पर इलाज न लिया जाए तो आंतों में अलसर हो जाता है।
इससे आंतों के फटने का डर रहता है और मरीज की मौत होना भी संभव है। इसके साथ ही वायरल फीवर में समय पर इलाज न लिया जाए तो प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, ऐसी स्थिति जानलेवा हो सकती है। इलाज से पहले बुखार आने की वजह जानन बेहद जरूरी है।
मामला संज्ञान में नहीं लाया गया है, गांव में टीम भेजकर बुखार से पीड़ितों को उपचार दिलाया जाएगा। अगर जरूरत होगी तो उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। -डॉ. एके पांडेय, सीएमओ।