चिकित्सकों ने नम आंखों से दी योगिता को श्रद्धांजलि
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने और लंबे समय की मेहनत के बाद समाज को एक चिकित्सक मिलता है, किसी ने आवेग में आकर उनकी हत्या कर समाज और चिकित्सा जगत को बड़ी क्षति पहुंचाई है।
स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि डॉ. योगिता में सीखने और कार्य करने की लगन थी। उनको जो भी चिकित्सकीय कार्य करने दिया जाता, वह खुशी मन से उसे करती। इसके चलते वह हमारे विभाग में सभी की प्रिय थीं।
आईएमए आगरा के अध्यक्ष डॉ. आरएम पचौरी ने कहा कि डॉक्टर की हत्या से एक ही परिवार का नुकसान नहीं होता, उससे समाज को भी क्षति पहुंचती है। उनकी आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब हत्यारे को कड़ी सजा मिले।
आईएमए आगरा के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि जानकर बेहद दुख और आश्चर्य भी हुआ। हत्या का आरोपी भी चिकित्सक है। ऐसे जिम्मेदार लोगों से यह कृत्य की उम्मीद नहीं थी। आवेग में कइयों को नुकसान हुआ है।
डॉ. लोकश त्रिपाठी ने कहा कि वह हमारी सीनियर थी, हमनें उनके नेतृत्व में 30 से अधिक प्रसव कराए। वह स्टेप बाय स्टेप सिखाती थीं, गलती होने पर डपटते हुए समझाती थी। हमारी शिक्षक और बड़ी बहन नहीं रहीं, मन बेहद दुखी है।
डॉ. जैफ्रे कलाईसेलवन ने कहा कि वह मेरी बैचमेट थी, कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के प्रसव कराने में हमारे साथ थीं। वह ड्यूटी के वक्त बेहद संजीदगी के साथ निभाती थीं। मरीजों की देखभाल करतीं, उनकी समस्या को तत्काल सुनतीं थीं।
डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि वह हमारी सीनियर थीं और बेहद ही अच्छी सर्जन थीं। पहली बार वह ही हमें ऑपरेशन में साथ लेकर गईं। उन्होंने केस से पहले तैयारियां, मरीज-नवजात की कैसे देखभाल को बारीकी से समझाया। उनकी मौत से निराश हूं।
डॉ. विकांशा कौशिक ने कहा कि डॉ. योगिता मैम बेहद सरल और शांत स्वभाव की थी। ऑपरेशन में उनकी कोई सानी नहीं थी। वह कभी सीनियर की तरह व्यवहार नहीं किया। छोटी बहन की तरह वह ऑपरेशन की बारीकियां समझाती थीं, उनकी हत्या से दुखी हूं।