मैसर्स एंड अग्रवाल कंपनी को 2006 से 2025 तक करीब 15 बार टेंडर मिला है। एक ही कंपनी को टेंडर दिया जा रहा। जबकि यहां की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट नजर आ रही है।
आगरा छावनी में सफाई व्यवस्था वर्षों से सवालों के घेरे में है। अब एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पिछले 19 वर्षों की बात करें तो 2006 से लेकर अब तक सफाई का ठेका ज्यादातर एक ही कंपनी मेसर्स अग्रवाल एंड कंपनी को ही मिलता रहा है।
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2006 में कंपनी को 1,11,000 रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान किया गया था। वर्तमान में यह आंकड़ा 45 लाख प्रतिमाह तक पहुंच गया है। लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद छावनी बदहाल है। कहीं मिट्टी और सिल्ट भरने से नाले गायब हो गए तो कहीं जलभराव, कूड़े के अंबार हैं। 2017 से 2020-21 तक टेंडर गरिमा कंपनी को मिला था, परंतु उसके बाद बार फिर मेसर्स एंड अग्रवाल कंपनी की वापसी हो गई। 2021 से लगातार यह कायम है।
नया टेंडर पारित नहीं, रिन्यू जारी
2025-26 के लिए नया टेंडर अब तक जारी नहीं किया गया है। इस वजह से पूर्ववर्ती ठेकेदार यानी मैसर्स कंपनी का ठेका स्वतः रिन्यू होता जा रहा है। छावनी निवासी विनोद बघेल ने बताया कि उन्होंने सफाई कंपनी और सीबीआई को शिकायती पत्र भेजा था। सीबीआई ने छावनी परिषद से रिपोर्ट मांगी थी। मगर हुआ कुछ नहीं। मनोनीत सदस्य राजेश गोयल का कहना है कि बैठक में टेंडर को लेकर मुद्दा हर बार उठाया गया है। सफाई की समस्या के कार्य निरीक्षण भी कराए जाते हैं। सीबीआई के शिकायत पत्र की जानकारी जुटाकर उस पर अधिकारी से बात कर जांच करेंगे।
दस्तावेज भेजे जाएंगे
सेनेटरी इंस्पेक्टर मनीष शर्मा ने बताया कि सफाई टेंडर की प्रक्रिया जारी है। पात्रता के आधार पर संबंधित कंपनी को टेंडर दे दिया जाएगा। सीबीआई की ओर से जो पत्र था उसकी जांच कर संबंधित दस्तावेज भेजे जाएंगे।