फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार के ‘नजदीकियों’ के कालेजों पर मेहरबानी

Sat, 06 Feb 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
विज्ञापन
विज्ञापन
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय राजनीतिक रसूखदार कालेज संचालकों पर मेहरबान है। आल इंडिया एजूकेशन सर्वे (एआईईएस) में डेटा अपलोड न करने वाले ऐसे ही 115 कालेजों को बार-बार मौके दिए जा रहे हैं। सर्वाधिक कालेज मैनपुरी, फीरोजाबाद और इटावा के हैं, ये संचालक खुद को सरकार का नजदीकी बताते हैं।
विज्ञापन

मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय देशभर में शैक्षणिक, आर्थिक, भौतिक गुणवत्ता के लिए ऑनलाइन सर्वे कर रहा है। इसमें कालेज को कोर्स, शिक्षक, छात्र, लैब, पुस्तकालय, फीस, मैदान से संबंधित जानकारियां दर्ज करनी हैं। विश्वविद्यालय से संबद्ध 623 कालेज हैं। इनमें से 115 कालेजों ने 2014-15 सत्र का विवरण जमा नहीं कराया है। इसकी अंतिम तिथि 15 जनवरी थी। 2015-16 सत्र के लिए जानकारी अपलोड करने के लिए 28 फरवरी अंतिम तिथि है। इसकी समीक्षा करने के लिए बीते दिनों उच्च शिक्षा के विशेष सचिव भी आए थे। इन्होंने विवरण अपलोड न करने वाले कालेजों की संबद्धता समाप्ति की संस्तुति कर शासन को भेजने की बात कही। लेकिन विश्वविद्यालय ने इनके खिलाफ रिपोर्ट नहीं बनाई। कुलसचिव एके अरविंद का कहना है कि दो-तीन दिन की और मोहलत दी है। इसके बाद इनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
डेटा देख मिलेगी ग्रांट
देशभर से डिग्री कालेजों का डाटा जमा होने के बाद ही मंत्रालय उच्चतर शिक्षा के लिए योजनाएं बनाएगा। इतना ही नहीं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान और यूनीवर्सिटी ग्रांट कमीशन का अनुदान भी उनके मानकों पर निर्भर करेगा। अभी तक मिली जानकारी के आधार पर प्रदेश की स्थिति शैक्षणिक क्षेत्र में देशभर में सबसे खराब बताई जा रही है।
विज्ञापन

फीस देने में भी पीछे
सरकार के नजदीकी बताए जाने वाले कालेज संचालक विश्वविद्यालय को परीक्षा शुल्क देने में भी पीछे हैं। अभी भी 31 कालेजों ने 2014-15 सत्र का परीक्षा शुल्क विश्वविद्यालय में जमा नहीं कराया है। इनको नोटिस दिए जाने बात की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें