हाईकोर्ट से शिक्षिका की नियुक्ति अमान्य किए जाने के बाद भी वेतन जारी करना तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) राजेश कुमार श्रीवास्तव को भारी पड़ा गया। मामले के करीब दो वर्ष बाद (पिछले हफ्ते) उनको निलंबित कर दिया गया है। वह निलंबन के समय से बिजनौर में डीआईओएस के पद पर तैनात थे।
साकेत विद्यापीठ में आभा शर्मा की तदर्थ शिक्षक के रूप में तैनाती हुई थी। वर्ष 1994 में कोर्ट के आदेश से उनको वेतन दिया जाने लगा। वर्ष 2000 में उनकी रिट खारिज हो गई। कोर्ट के आदेश को वह किसी के संज्ञान में लाए बिना वर्ष 2012 तक वेतन लेती रही। वर्ष 2012 में मामला संज्ञान में आने पर उनका वेतन रोक दिया गया। शिक्षिका ने पुनर विचार याचिका डाली। जनवरी 2013 में सुनवाई के बाद कोर्ट ने अंतिम आदेश जारी किया और आभा शर्मा की नियुक्ति को अमान्य कर दिया। अधिकारियों को प्रत्यावेदन देने का सुझाव भी दिया।
शिक्षिका ने जिला विद्यालय निरीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर वेतन जारी करने की मांग की। इस पर तत्कालीन डीआईओएस राजेश कुमार श्रीवास्तव ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से मार्गदर्शन लेकर वेतन जारी करा दिया। उनके बाद आए डीआईओएस दिनेश कुमार यादव ने शिक्षिका की सेवाएं मान्य नहीं की। जून 2014 में उनको हटाने का आदेश कर दिया। आभा शर्मा ने जुलाई 2014 में फिर कोर्ट से स्टे ले लिया। डीआईओएस दिनेश कुमार ने स्पेशल अपील की परमिशन ली। इसमें सुनवाई के बाद तत्कालीन डीआईओएस राजेश कुमार श्रीवास्तव के निलंबन का आदेश जारी किया गया।