दिन में कोई लुटा तो फौजदार देते थे मुआवजा
मुगल शहंशाह शाहजहां ने पुलिस व्यवस्था में इस हद तक सख्ती की कि अगर सड़कों पर दिन के समय किसी राहगीर के साथ लूट हो जाती तो उस सूबे के फौजदार को लूट का मुआवजा देना होता था। विवि के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुगम आनंद के मुताबिक विविधताओं से भरे भारत में कोतवाल और पुलिस व्यवस्था पहले भी थी, पर मुगलकाल में यह व्यवस्थित की गई।
आगरा सूबे में थे 13 सरकार और 203 परगना
मुगल काल में आगरा की अहमियत ज्यादा थी। राजधानी होने के कारण यहां के कोतवाल बेहद ताकतवर समझे जाते थे। आगरा सूबा 13 सरकार यानी जिलों में बंटा था, जिसमें 203 परगना थे। घाटमपुर से पलवल और कन्नौज से चंदेरी तक फैले आगरा सूबे के पास मुगल काल में 50,681 घुड़सवार जवान, 5,77,570 पैदल सैनिक और 221 हाथी थे। सूबे में 2.78 करोड़ बीघा जमीन और 54 करोड़ रुपये की आय थी।