फैटी लिवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज में इन दिनों बड़ी संख्या में ऐसे मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बदलती जीवनशैली, शराब का सेवन, नींद की कमी और बाहर का तला भुना खानपान इसके प्रमुख कारण हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर पीड़ित अपना वजन 10 किलो तक कम कर लेते हैं तो वे समस्या से बच सकते हैं।
मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि इन दिनों रोजाना लगभग 60 मरीज फैटी लिवर के पहुंच रहे हैं। यानि महीने में करीब 1800 मरीज फैटी लिवर (लिवर फाइब्रोसिस) से पीड़ित लोग इलाज के लिए आते हैं। यह अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि युवाओं में भी ये तेजी से फैल रही है। उन्होंने बताया कि जंक फूड का अधिक सेवन, देर रात तक जागना, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि लोग इस बीमारी में अक्सर दवाइयों की ओर भागते हैं, जबकि सबसे जरूरी है वजन पर नियंत्रण। अगर कोई व्यक्ति, जिसे फैटी लिवर है, अपना करीब 10 किलो वजन कम कर लेता है, तो कई मामलों में यह समस्या खत्म हो सकती है। इसलिए दवा से पहले वजन घटाने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामने नहीं आते, लेकिन समय के साथ यह गंभीर हो जाता है। इसलिए नियमित जांच और जीवनशैली में सुधार जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि लोग संतुलित आहार लें, रोजाना व्यायाम करें, शराब से दूरी बनाएं और अच्छी नींद लें।
डायबिटीज मरीज रखें खास ध्यान
डायबिटीज के मरीजों में फैटी लिवर का खतरा ज्यादा होता है। वह हमेशा ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें। मीठा और ज्यादा तले भोजन से परहेज करें। नियमित व्यायाम और वजन का नियंत्रण सबसे जरूरी है।