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Lockdown: सैनिक बेटे के अंतिम दर्शन को उमड़े लोग, माता-पिता ने हाथ जोड़कर लौटाया

Sun, 19 Apr 2020 05:10 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

बाह क्षेत्र के गांव विक्रमपुर निवासी निशान सिंह (40) सेना के हवलदार थे। वो लखनऊ में राजपूत रेजीमेंट में तैनात थे।
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सैनिक के माता-पिता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा जिले में कोरोना वायरस के जंग के बीच सैनिक बेटे की अंतिम यात्रा में शामिल होने आए लोगों को पिता ने लॉकडाउन का हवाला देकर लौटा दिया। सैनिक के अंतिम संस्कार में परिवार के कुछ ही लोग शामिल हुए। इस दौरान सामाजिक दूरी का पूरा ख्याल रख गया। 
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बाह क्षेत्र के गांव विक्रमपुर निवासी निशान सिंह (40) सेना के हवलदार थे। वो लखनऊ में राजपूत रेजीमेंट में तैनात थे। शुक्रवार को ब्रेन हैमरेज के कारण उनका निधन हो गया। शनिवार को तिरंगे में लिपटा शव गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए लोग जुट गए। 

सैनिक निशान सिंह के भावुक पिता सुदान सिंह और मां ने हाथ जोड़कर लॉकडाउन का हवाला देकर लोगों को घर भेज दिया। इसके बाद लोगों ने छत से अंतिम यात्रा पर पुष्प बरसा कर सैनिक को अंतिम विदाई दी। अंत्येष्टि स्थल पर 10-12 लोग ही पहुंचे।
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सैनिक की पत्नी और उनके बच्चे - फोटो : अमर उजाला
सेना के अधिकारियों ने सैनिक के भाई सुरेश सिंह को तिरंगा सौंपते हुए बताया कि प्रधानमंत्री के आह्वान और लॉकडाउन के कारण शनिवार सुबह ही सैनिक सलामी का कार्यक्रम रोक दिया गया। 

अंत्येष्टि स्थल पर बेटे मनीष ने सैनिक पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान भी लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) का ख्याल रखा। प्रशासन की ओर से कानूनगो रामकिशन ने पुष्पांजलि दी। 

बेटा-बेटी बोले, वे भी फौजी बनेंगे

वीरनारी रेखा देवी अपने पति का शव देख कर बेसुध हो गईं। बाद में बताया कि 14 अप्रैल को आखिरी बार उनकी बात हुई थी। कहा था कि बेटा-बेटी को पढ़ा-लिखाकर सेना का अफसर बनाना है। 

मां को संभाल रहे पुत्र मनीष और बेटी पल्लवी ने सरकार से सैनिक पिता का शहीद स्मारक बनवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पापा का सपना पूरा करने के लिए वे भी फौजी बनेंगे। 
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पिता, दो भाई-दो भतीजे भी हैं सेना में

निशान सिंह को खोने वाले पिता सूबेदार सुदान सिंह और भाई सुरेश सिंह भी सेना में रह चुके हैं। सुदान सिंह ने 1965, 1971 की जंग में अपनी बहादुरी की छाप छोड़ी है। 

सुरेश सिंह ने जम्मू कश्मीर के उरी और नौगांव सेक्टर में ऑपरेशन पराक्रम में अपना लोह मनवाया था। सुरेश के बेटे अशोक जम्मू में सुरजीत सिंह पठानकोट में तैनात हैं। निशान सिंह के छोटे भाई पंचम सिंह नागालैंड में उग्रवादियों से मोर्चा लिए हैं।         
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