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Mathura: जेल में बंद दहेज हत्या के आरोपी ससुर ने लगाई फांसी,  बैरक के बाहर फंदे पर लटका मिला शव 

Tue, 05 Jul 2022 01:47 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

दहेज हत्या के मामले में जेल में बंद ससुर ने सजा के डर से मौत को गले लगा लिया। केस दिन पर दिन आगे बढ़ रहा था। बेटे के ससुरालीजन समझौते को तैयार नहीं थे। 
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फंदा - फोटो : फांसी का फंदा
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विस्तार
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मथुरा जिला जेल में सोमवार दोपहर को करीब 12 बजे दहेज हत्या में बंद एक बंदी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। तमाम सुरक्षा व्यवस्था होने के बाद भी बैरक के बाहर पिलर से कपड़े की रस्सी बांधकर बंदी लटक गया। जेल अधिकारियों ने बंदी का शव परिजनों को सौंप दिया। 

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मडौरा बलदेव निवासी हरी सिंह (65) पुत्र धर्म सिंह पुत्रवधू मोनिका की दहेज हत्या के मामले में 23 मई 2021 से जेल में बंद था। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे बंदी ने बैरक नंबर 7 के बाहर पिलर पर कपड़े की रस्सी बनाकर फंदा लगा लिया। जानकारी लगते ही आसपास के बंदियों ने उसे रस्सी से नीचे उतार लिया और जेल अधिकारियों को सूचना दी। गंभीर हालत में उसे जिला जेल के अस्पताल में ले जाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने उसे प्राथमिक इलाज देकर जिला अस्पताल रवाना कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। 

हरी सिंह सहित उसका बेटा नीरज व पत्नी रामरती भी दहेज हत्या के मामले में जेल में बंद है। जेल अधीक्षक बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि बंदी के केस में तेजगति से गवाही चल रही थी। बंदी केस को लेकर चिंतित था और उसने कुछ देर पहले बेटी से बातचीत भी की है। फंदा लगाए जाने के बाद आसपास के बंदियों ने उसे रस्सी से नीचे उतार लिया। अस्पताल जाते समय उसने दम तोड़ दिया।

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आत्महत्या से पहले बेटी से की बात 

अप्रैल 2021 में हरीसिंह के पुत्र नीरज की पत्नी मोनिका का शव ससुराल में फंदे पर लटका मिला था। ससुरालीजनों ने दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें नामजद हुए पति नीरज, सास रामरती और ससुर हरी सिंह को बलदेव पुलिस ने जेल भेज दिया। सोमवार को आत्महत्या करने से एक घंटे पहले ही बंदी ने केस के संबंध में बेटी से बातचीत की थी। 

दोपहर करीब 12:30 मिनट पर जेल अधिकारियों का फोन हरी सिंह के बेटे धीरज के पास पहुंचा और हरी सिंह की आत्महत्या की जानकारी दी। सूचना मिलने पर हरी के बेटे, बेटी तथा अन्य गांव में मौजूद सभी परिजन जेल पहुंच गए। जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि बंदी का शव परिजन को पोस्टमार्टम के बाद सौंप दिया गया।

आत्महत्या के लिए तैयार की दो गमछों की रस्सी

हरी सिंह ने आत्महत्या के लिए दो गमछों की रस्सी बनाकर बैरक के उस कोने को आत्महत्या के लिए चुना जहां पर आसानी से लोगों की नजर नहीं जा सके। बंदी के इस गमछे की रस्सी से लटकते ही आसपास के बंदियों ने आकर उतारा। जिस समय उतारा था, उस समय मुंह से कुछ ही देर पहले खाया हुआ भोजन बंदी के मुंह से निकल रहा था। 
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