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Agra News: विवादित ढांचा विध्वंस की ईंट पिता लाए साथ

Mon, 22 Jan 2024 01:07 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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सोरोंजी। तीर्थनगरी की धर्म प्रसार शाखा के प्रमुख व तुलसी मेला के संस्थापक स्व. परमहंस वशिष्ठ अक्टूबर 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन में जेल गए। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी विध्वंस के लिए की गई कारसेवा में भी हिस्सा लिया। वे उस समय बाबरी विध्वंस के साक्षी थे। उनके पुत्र केशव बताते हैं कि कारसेवा का कार्य पूरा होने के बाद जब वे तीर्थनगरी लौटे तब वे ढांचे की एक ईंट भी ले आए जिसे वे लोग आज भी सुरक्षित रखे हैं। केशव देव वशिष्ठ ने पिता की तस्वीर के साथ वह ईंट भी दिखाई जो पिता विवादित ढ़ाचे के विध्वंस के बाद अयोध्या से साथ लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में उनके पिता के साथ स्व. सोमदत्त बड़गैयां एवं स्व. सुमन कुमार गुप्ता भी जेल गए थे। मैनपुरी जेल में डेढ़ माह तक बंदी रहने के बाद वे रिहा हुए। उन्होंने बताया कि पिता के जेल जाने के बाद वह भी सक्रिय हुए। तीर्थनगरी से तमाम कारसेवकों ने गिरफ्तारी की जिन्हें स्कूल कॉलेज में बनाई जेलों में रखा गया।
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पिता के साथ राम जन्मभूमि आंदोलन में जेल गया
सोरोंजी। तीर्थनगरी के गंगाजली के थोक विक्रेता राजू मिश्रा का कहना है कि जब वह 19 वर्ष के थे, तब वह 1990 में पिता छोटेलाल मिश्रा के साथ मैनपुरी जेल में 35 दिन तक रहे। उन्होंने कहा कि पिता के मन में राम मंदिर के निर्माण का सपना था और वे इस आंदोलन में बढ़ चढकऱ हिस्सा ले रहे थे। उन्हीं की प्रेरणा से राजू ने भी पिता का साथ दिया। राजू कहते हैं कि आज पिता तो जीवित नहीं हैं, लेकिन उनका संजोया सपना पूरा होते देख रहे हैं। आज अयोध्या में श्रीराम विराज रहे हैं।
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