विश्व धरोहर फतेहपुर सीकरी की हवा सोमवार को करीब 14 घंटे तक बेहद खराब रही। यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 256 दर्ज किया गया। राजस्थान की ओर से आ रही उत्तर पश्चिमी हवाओं के साथ आ रहे धूल कणों के कारण यह हाल हुआ। यहां धूल के सूक्ष्म कण (पार्टिकुलेट मैटर) सामान्य से पांच गुना अधिक दर्ज किए गए। इस सीजन में पहली बार पीएम-10 की मात्रा बेहद खतरनाक स्तर 500 के पार पहुंच गई।
खराब हवा के कारण पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सांस लेने में दिक्कत व आंखों में जलन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को आगरा के छह और फतेहपुर सीकरी में लगे एक ऑटोमेटिक स्टेशन में सबसे ज्यादा प्रदूषण सीकरी में दर्ज किया गया। यही हाल पीएम-2.5 का है, जो 414 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किए गए।
रविवार रात आठ बजे से सोमवार सुबह 10 बजे तक प्रदूषण के हालात बेहद खराब रहे। करीब 14 घंटों तक पीएम-2.5 और पीएम-10 कणों ने लोगों के सामने सांसों का संकट खड़ा कर दिया। इस सीजन में यह पहला मौका है जब धूल के सूक्ष्म कण खतरनाक स्तर तक पहुंचे हैं। इसके उलट शहर के ऑटोमेटिक स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता बेहतर बताई गई। ताजमहल के पास एक्यूआई 82 दर्ज किया गया।
राजस्थान से आ रही धूल ने बिगाड़ी हवा
राजस्थान की ओर से आ रहे धूल कणों को मापने के लिए इस साल ही अगस्त में फतेहपुर सीकरी में ऑटोमेटिक स्टेशन लगाया गया है। करीब दो माह के आंकड़ों में यहां सबसे खराब इसी माह एक अक्तूबर को रही, जब एक्यूआई 324 रहा। इस पूरे माह बेहद खराब श्रेणी में हवा की गुणवत्ता करीब पांच दिन रही है। 21 अक्तूबर को एक्यूआई 243, 23 को 231, 25 को 241 और 26 अक्तूबर को 256 दर्ज किया गया। इससे पर्यटक और क्षेत्रीय निवासियों को सांस लेने, आंखों में जलन, नाक में एलर्जी ने परेशान किया।
जिले में प्रदूषण का यह हाल
- स्टेशन एक्यूआई
- मनोहरपुर 108
- रोहता 139
संजय प्लेस 173
शास्त्रीपुरम 148
शाहजहां गार्डन 82
आवास विकास 128
राजस्थान सीमा पर लगाएं घना वन
पर्यावरणविद और शहर को 800 हेक्टेयर का जंगल देने की लड़ाई लड़ने वाले चिकित्सक डॉ. शरद गुप्ता के मुताबिक एयर एक्शन प्लान में स्पष्ट था कि राजस्थान से आ रही धूल भरी हवाओं को रोकने के लिए सीमा पर ट्री शेड बनाने की जरूरत है। राजस्थान सीमा से तेरहमोरी बांध तक और सीकरी से पथौली के बीच दो स्ट्रेच में घना पौधरोपण किया जाए ताकि धूल भरी हवाएं न आ सकें। रेगिस्तान को बढ़ने से रोकने के लिए भी यह जरूरी है।
पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि शहर में संजय प्लेस और शास्त्रीपुरम को छोड़कर सभी जगह हवा की गुणवत्ता अच्छी है। यहां भी धूल कणों को कम करने के लिए पानी का लगातार छिड़काव कराया जा रहा है। कचरा, लकड़ी और कोयला जलाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है। कहीं कोई ऐसा करे तो तत्काल निगम में शिकायत करें।