मथुरा। कोसीकलां में राजमार्ग से अपने गंतव्य को गुजरते मजदूर।
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कोसीकलां (मथुरा)। सिर पर गठरी रखकर बच्चों को गोद में लेकर महिलाएं और पुरुष बॉर्डर पार करने का प्रयास कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान इन दिनों सड़कों पर लोगों के जत्थे नजर आ रहे हैं। लोग पैदल की गुजर रहे हैं। हाथों में बैग और इनके कंधे पर छोटे छोटे बच्चे बैठे हैं। ये लोग कोरोना वायरस के खौफ में बंद की गई फैक्टरियों के श्रमिक और उनके परिजन हैं।
गाजियाबाद, दिल्ली और हरियाणा के साथ-साथ आदि शहरों में रहकर मेहनत मजदूरी कर अपने और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। लेकिन लॉकडाउन में फैक्टियां बंद होने से इनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया। इनके पास न तो काम बचा और न ही खाने पीने का सामान खरीदने के लिए पैसे। अब ये सभी अपने घरों को पलायन करने को मजबूर हैं। लोग पैदल ही भूखे प्यारे सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय रहे हैं।
राजमार्ग से गुजरने वाले लोगों का दर्द झकझोर देने वाला है। झांसी निवासी विजय, सूरज, मोहन का कहना है कि वह परिवार के साथ गुरुग्राम में रहकर मेहनत मजदूरी कर गुजर बसर कर रहे थे। कोरोना की वजह से ठेकेदार ने काम बंद करा दिया। उन्हें बिना पैसे दिए ही ठेकेदार चला गया। उसने फोन भी बंद कर लिया। जैसे तैसे वह पलवल तक आ गए। पलवल प्रशासन उन्हें बस के माध्यम से यूपी बार्डर पर उतार गया।
सोना, रानी, राखी, भूरी का कहना था कि हमारे सामने खाने पीने का संकट हो गया। शाम को एक ढाबा मालिक ने उन्हें भोजन करा दिया। रात्रि में वह पैदल चलकर मंडी समिति परिसर में रुक गए। लोगों से मदद मांगी तो उन्होंने खाने-पीने की व्यवस्था की। घर लौटने के सिवा हमारे सामने कोई अन्य विकल्प ही नहीं बचा। मऊरानीपुर के रहने वाले रामहेत ने बताया कि वह दिल्ली में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन बंद होने की वजह वहां पुलिस वाले कहीं रुकने नहीं दे रहे हैं। बसें और ट्रेनें बंद हैं। जिसकी वजह से वह अपने घर पैदल ही लौट रहे हैं।