फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खाने का शौक ले रहा जान: सीने में भारीपन, भोजन निगलने में दिक्कत...तो हो जाएं सावधान, ये हैं कैंसर के संकेत

Mon, 12 Jan 2026 02:27 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

अधिक फास्ट फूड का सेवन जानलेवा बन रहा है। रोज चाऊमीन, मोमोज, बर्गर खाने से 18-20 की उम्र में आंतों का कैंसर हो रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।
विज्ञापन
खाने का शौक ले रहा जान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें


विज्ञापन
खाने में रोजा चाऊमीन, बर्गर, पिज्जा, मोमोज और पीने के लिए कोल्डड्रिंक। वहीं सलाद, हरी सब्जी और फलों से दूरी... लंबे समय तक ऐसी स्थिति के कारण 18-20 की उम्र के युवाओं की आंतों और खाने की नली में कैंसर हो रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

कैंसर रोग विभाग की डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि 2025 में कैंसर के 1911 मरीजों के अध्ययन में बड़ी आंत और खाने की नली के 8.1 फीसदी मरीज मिले। इनमें से 20-40 साल की उम्र के सबसे ज्यादा 65-70 फीसदी मरीज हैं। एक की उम्र तो सिर्फ 18 साल है। पूछताछ में ये सभी पैकेट बंद खाना, फास्टफूड, रेड मीट, तंबाकू, एल्कोहल के शौकीन निकले। इससे मोटापा से भी परेशान हैं। इनमें कई मरीज सप्ताह में 4-5 दिन बाहर का खाना खा रहे थे।
विज्ञापन

 

उन्होंने बताया कि लंबे समय तक ऐसे भोजन से आंत में जख्म बनने लगते हैं। हरी सब्जी, दालें, मौसमी फल का भरपूर उपयोग नहीं करने से मर्ज पनपने की दर तेजी से बढ़ जाती है। खाने की नली के कैंसर में 40-50 साल के मरीजों की संख्या आधी है। ये शराब, तंबाकू के आदी मिले। बीते पांच वर्षों में आंत और खाने की नली के कैंसर के मरीज डेढ़ गुना तक बढ़े हैं।


 

आंत के कैंसर का ऑपरेशन कराने वाले 70 फीसदी युवा
एसएन कॉलेज के कैंसर सर्जन डॉ. वरुण अग्रवाल ने बताया कि हर महीने आंत में कैंसर के मरीजों के ऑपरेशन कर रहे हैं। इनमें 20-40 साल के मरीज 70 फीसदी हैं। पूछताछ में फास्टफूड, जंक फूड का सेवन, खराब फिटनेस और फाइबरयुक्त भोजन की कमी सबसे बड़ी वजह मिली। 10 साल पहले की बात करें तो ये बीमारी 50 की उम्र के बाद के लोगों में ही मिलती थी।

 

सिंथेटिक रंग, प्रिजर्वेटिव बन रहे कैंसरकारक
आगरा कॉलेज के रसायन विज्ञान के प्रो. अमित अग्रवाल ने बताया कि फास्टफूड-पैकेट बंद भोजन में स्वाद के लिए अजीनोमोटो, सिंथेटिक रंग और रंगीन फ्लेवर्ड का इस्तेमाल करते हैं। पैकेट बंद भोजन को फफूंद से बचाने के लिए प्रिजर्वेटिव का उपयोग करते हैं। इसमें सोडियम बेंजोएट, पोटेशियम सॉर्बेट, पैकेजिंग से रिसने वाले रसायन होते हैं। ये कैंसरकारक होते हैं और शरीर में पहुंचकर ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक इनके उपयोग से आंतों को बहुत नुकसान होता है।

 

आंत-खाने की नली के कैंसर के लक्षण
- काला मल, रक्त आना, वजन घटना, पेट में ऐंठन।
- भोजन निगलने में दिक्कत होना, छाती में भारीपन।
- जलन होना, पाचन शक्ति कमजोर होना।

 

ये करें:
- फास्टफूड-जंक फूड और बाहर के भोजन से बचें।
- दाल, हरी सब्जी, दलिया, खिचड़ी, फल अधिक खाएं।
- शराब, धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें।
- रोजाना आठ गिलास पानी पीएं, 60 मिनट व्यायाम करें।
- रिफाइंड का उपयोग कम करें। तले भोजन से बचें।




 
विज्ञापन

कैंसर मरीजों के अध्ययन के आंकड़े

1911: मरीज कैंसर पीड़ित
859 को गले-मुंह का कैंसर
324 को स्तन कैंसर
193 को फेफड़ों का कैंसर
191 को बच्चेदानी का कैंसर
152 को आंत-खाने की नली का कैंसर
114 में पित्त की थैली का कैंसर
78 को अन्य कैंसर


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें