एनजीटी के आदेश के बाद भी किसान पराली जलाना बंद नहीं कर रहे हैं। जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। अधिकांश किसान अब धान की फसल को कंबाइन मशीन से कटवाते हैं।
ऐसे में खेत में बची पराली का किसान निस्तारण करने की जगह उसमें आग लगा देते हैं। किशनी और कुसमरा क्षेत्र में किसान धड़ल्ले से ये पराली जा रहे हैं। वैसे तो पराली जलाने पर जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन प्रशासन द्वारा कार्रवाई न किए जाने के कारण किसान बेधड़क इसे जला रहे हैं।
वे इस बात से भी अंजान हैं कि इससे पर्यावरण तो प्रदूषित हो रहा है, लेकिन उनके खेत में मित्र कीट भी मर रहे हैं। इसका खामियाजा उन्हें फसलों के कम उत्पादन के रूप में भुगतना होगा। इसके लिए जरूरी है कि प्रशासन किसानों को पराली के निस्तारण के लिए जागरूक करे। ताकि प्रदूषण को रोका जा सके।