खेती-मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहा था सत्येंद्र
परिजन ने बताया कि सत्येंद्र की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह परिवार के भरण पोषण के लिए खेती के साथ मजदूरी भी करता था। उसके दो बेटे हैं। सात दिन पूर्व पत्नी मायके गई थी। घर पर परिवार के साथ अलग कमरे में रहता था। किसी को इसकी भनक तक नहीं थी कि सत्येंद्र इतना बड़ा कदम उठाएगा।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सत्येंद्र की मौत की खबर सुनकर उसकी पत्नी बच्चों के साथ मायके से ससुराल आ गई। सत्येंद्र चार भाइयों में सबसे छोटा था। वह कांच के कड़े बनाने के लिए किसी ठेकेदार से कच्चा माल लाकर तैयार भी करवाता था। दोपहर बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया।