मैनपुरी। मृदा में अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों, कीट नाशकों का उपयोग हुआ है। जिससे पैदावार तो बढ़ी लेकिन वातावरण मिट्टी, हवा, पानी दूषित हुआ है। वातावरण को सामान्य रखने के लिए जैविक पद्धति से खेती करनी होगी। जैविक पद्धति से खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। यह बातें डीएम प्रमोद कुमार उपाध्याय ने कहीं।
टीईपी सेंटर के सभागार में खरीफ उत्पादकता गोष्ठी, किसान मेला में उन्होंने किसानों से कहा कि परंपरागत खेती के साथ पशुपालन को बढ़ावा दें। जैविक खादों का अधिक से अधिक प्रयोग कर कम लागत में अच्छी उत्पादकता लेकर आमदनी बढ़ाकर आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। गांव में किसान पाठशाला का आयोजन कर किसानों को उन्नत खेती करने, फसल चक्र अपनाने, कम लागत में ज्यादा उत्पादन करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों को द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है।
डॉक्टर विकास रंजन चौधरी ने ख्ेाती को वैज्ञानिक विधि से करने, जैविक खाद का प्रयेाग करने, प्रमाणित बीजो के प्रयेाग करने, रसायनिक दवाओं को उचित समय पर संतुलित मात्रा में प्रयोग के बारे में जानकारी दी। कृषक वीरेंद्र सिंह, सिराज अहमद, डा. कुमार वैभव ने जैविक खेती के अनुभव साझा किए। सीडीओ कपिल सिंह, उप निदेशक कृषि दुर्विजय सिंह, आचार्य टीईपी सेंटर धीरेंद्र कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी गगनदीप सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी विजय सिंह मौजूद रहे।
किसानों को वितरित की किटें
डीएम ने प्रगतिशील किसान प्रदीप, दीनदयाल, सिनोद कुमार पाल, सोवर सिंह पाल, बॉबी कुमार पाल, धर्मेंद्र, संतोष, विजय सिंह, जितेंद्र सिंह, अशोक कुमार को उर्द, मूंग बीज की मिनी किट दी। रतनकुमार, सहराज, सतीश, हरमत सिंह, संदीप सिंह को सागारिका जैविक इफक्को एवं जैव उवर्रक कृभको किट दी। कृषक साहब सिंह, राहुल सिंह, सुदामा देवी, ताहर सिंह, बालकृष्ण को प्रमाणपत्र दिए।