धोखाधड़ी, एससी-एसटी एक्ट, आईटी एक्ट समेत अन्य आरोप के मामले में विभव नगर, ताजगंज निवासी शैलेंद्र अग्रवाल को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। शैलेंद्र अग्रवाल धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज होने पर चर्चित हुए थे।
मामले में फतेहगढ़, फर्रुखाबाद निवासी श्वेता सिंह उर्फ रंजीता सिंह पत्नी विजय सिंह चक ने केस दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि पति विजय सिंह चक आगरा में चौकी जीआरपी आगरा सिटी पर तैनात हैं। उसकी जानकारी में आया कि शैलेंद्र अग्रवाल के कई कोल्ड स्टोरेज हैं। वह आलू का बड़ा व्यापारी है। उसके व्यापार में कई अधिकारियों ने अपना रुपया लगा रखा है। उनको वह प्रतिशत के हिसाब प्रतिवर्ष आय का लाभ देता है।
श्वेता ने स्वयं एवं रिश्तेदारों के रुपये लेकर 10 लाख रुपये आरोपी के व्यापार में लगा दिए। एग्रीमेंट की कहने पर शैलेंद्र अग्रवाल ने टाल दिया। बाद में ज्ञात हुआ कि वह ऐसे ही लोगों से रुपये लेकर अन्यत्र लगा देते हैं। रकम मांगने पर उसने डेढ़ लाख रुपये दे बाकी रकम नहीं दी। फर्जी फोन कराया था।
मामले में वादी सहित उनके पति समेत सात गवाहों की गवाही दर्ज हुई। आरोपी के खिलाफ विभिन्न थानों में धोखाधड़ी आरोप में कई केस दर्ज हुए थे। ज्यादातर मामलों में वादी से समझौता हो गया। इस पर उन्हें बरी कर दिया गया।