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नवजात की मौत पर परिजनों का हंगामा

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30एमएनपी-34-किशनी के एक प्राइवेट अस्पताल में हंगामा की सूचना पर पहुंची पुलिस जानकारी लेते हुए - फोटो : MAINPURI
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किशनी। नगर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात की हालत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने नवजात को रेफर कर दिया लेकिन एंबुलेंस की सुविधा न होने के कारण परिजन उसे कहीं नहीं ले जा सके। समय से उचित उपचार न मिलने के कारण नवजात की मौत हो गई। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया।
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गांव अभयपुर निवासी मदनगोपाल की पुत्री शीतला को प्रसव पीड़ा होने पर मां ऊषा देवी ने किशनी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां सीजेरियन प्रसव के बाद शीतला ने एक बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद नवजात की हालत बिगड़ गई। इस पर चिकित्सक ने नवजात को रेफर कर दिया। हालांकि अस्पताल में एंबुलेंस की सुविधा नहीं थी। इस पर परिजन नवजात को ले जाने की व्यवस्थाओं में जुट गए लेकिन कुछ ही देर में नवजात की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दी।
आक्रोशित परिजन करीब दो घंटे तक अस्पताल में हंगामा काटते रहे। बच्चे के ताऊ चंद्रपाल निवासी नगला मदारी ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन बच्चे के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करा सका। चंद्रपाल ने कहा कि उसने सीएचसी पर भी फोन किया लेकिन वहां से भी एंबुलेंस नहीं मिल सकी। परिजनों को आरोप था कि अस्पताल में एंबुलेंस सुविधा और उपचार की उचित व्यवस्था न होने के कारण नवजात की मौत हुई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी ली और समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया। बाद में परिजन रिपोर्ट दर्ज कराए बिना ही शव को गांव ले गए।
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ससुरालीजनों पर अनदेखी का आरोप
हंगामे के बीच शीतला की मां ऊषा देवी ने पुलिस को बताया कि अस्पताल प्रशासन की कोई गलती नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षित प्रसव कराया था लेकिन बाद में बच्चे की हालत बिगड़ गई। ऊषा देवी ने आरोप लगाया कि उसका दामाद राजीव पंजाब में रहता है। राजीव के परिजन शीतला का ख्याल नहीं रखते हैं। इसके चलते शीतला उसके यहां आ गई थी।
शीतला को गर्भावस्था में उचित देखभाल नहीं की गई, जिससे वह कमजोर हो गई। प्रसव के दौरान शीतला की जान को भी खतरा था। चिकित्सकों ने शीतला की जान तो बचा ली लेकिन बच्चा नहीं बच सका।
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