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SDM की गाड़ी के आगे लेटा परिवार: अवैध कब्जे पर कार्रवाई नहीं होने से तीन घंटे हंगामा, अफसरों के फूले हाथ-पांव

Mon, 09 Mar 2026 09:39 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

अवैध कब्जे की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने पर एक परिवार का आक्रोश फूट पड़ा। वह एसडीएम की गाड़ी के आगे लेट गए। इससे तहसील में अफरातफरी मच गई। तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा।
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फरियादी से बात करते अधिकारी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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तहसील सदर परिसर में सोमवार को तीन घंटे अफरा-तफरी मची रही। अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एक फरियादी का परिवार एसडीएम की गाड़ी के आगे लेट गया। करीब तीन घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। हंगामे से पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में शाहगंज थाने से फोर्स बुलानी पड़ी। एसडीएम द्वारा मौके पर जाकर जांच करने के आश्वासन के बाद ही परिवार एसडीएम की गाड़ी के सामने से हटा। 
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ग्राम बांईपुर निवासी दिव्यांग किशन सिंह बघेल, मनीष और शारदा देवी सोमवार सुबह करीब 11.30 बजे तहसील मुख्यालय पहुंचे थे। शारदा देवी का आरोप है कि वे पिछले तीन महीने से कार्रवाई के लिए भटक रहे हैं। उनके परिवार के ही एक दबंग व्यक्ति ने उनकी जमीन पर दीवार खड़ी कर अवैध कब्जा कर लिया है। जब उन्हें लगा कि सुनवाई नहीं हो रही, तो उन्होंने एसडीएम के वाहन का रास्ता रोक लिया और वहीं जमीन पर धरने पर बैठ गए।

एसडीएम सचिन राजपूत ने पीड़ित परिवार को साथ ले जाकर नायब तहसीलदार और क्षेत्रीय लेखपाल की टीम के साथ तत्काल मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मामला आपसी पारिवारिक विवाद का निकला। एसडीएम ने बताया कि विवाद खसरा संख्या 1033 को लेकर है। राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि बंजर दर्ज है, लेकिन चकबंदी के आकार पत्र-41 और सजरे में इसे सामान्य आबादी दिखाया गया है। मौके पर चकबंदी के समय से ही पुराने कच्चे-पक्के मकान बने हुए हैं।
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दबाव की राजनीति नहीं चलेगी, कोर्ट जाएं फरियादी
एसडीएम सचिन राजपूत ने कहा कि लेखपाल की पुरानी रिपोर्ट सही थी। यह मामला पूरी तरह से निजी आवासीय संपत्ति के कब्जे का है, जिसमें राजस्व विभाग सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि मौके पर पुराने मकान बने हैं, जो निजी संपत्ति का हिस्सा हैं, इसलिए इसका निस्तारण केवल माननीय सिविल न्यायालय (दीवानी अदालत) के माध्यम से ही संभव है।

सरकारी कार्य में न डालें बाधा
तहसील परिसर में शासकीय कार्य में बाधा डालकर दबाव बनाना उचित नहीं है। फरियादी को कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए।— सचिन राजपूत, एसडीएम सदर

करेंगे आमरण अनशन
हमें न्याय नहीं मिला, तो वे जिलाधिकारी कार्यालय पर आमरण अनशन करेंगे। पुलिस और प्रशासन ने अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध कारवाई नहीं की। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही। - किशन सिंह बघेल, पीड़ित

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