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आखिर ये भेदभाव क्यों: बेटे को दूध, बिटिया को सिर्फ चाय-रोटी, कोरोना काल में परिजनों ने ऐसे रखा बच्चों का ख्याल

Sat, 30 Jul 2022 05:09 PM IST
मुकेश कुमार धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला आगरा

सार

पोषण पुनर्वास केंद्र में 2020 से सात जुलाई 2022 तक केंद्र में 663 कुपोषित बच्चे भर्ती हुए। इनमें 365 बेटियां अैर 298 बेटे कुपोषित पाए गए। भर्ती होने वालों में निम्न वर्ग के बच्चे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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आर्थिक मजबूरी कहें या फिर बेटा-बेटी की परवरिश में भेदभाव। आगरा में कोरोना महामारी में कई ऐसे परिवार भी रहे, जिन्होंने बेटों को पीने के लिए दूध और खाने को फल दिए। बेटियों की बात आई तो उन्हें चाय के साथ रोटी थमा दी। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कुपोषित बच्चों की मां ने इसकी वजह कम आमदनी और घर के बुजुर्गों के दबाव को बताया।

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पोषण पुनर्वास केंद्र की प्रभारी डॉ. नीता चिवटे ने बताया कि मार्च 2020 से सात जुलाई 2022 तक केंद्र में 663 कुपोषित बच्चे भर्ती हुए। इनमें 365 बेटियां अैर 298 बेटे कुपोषित पाए गए। भर्ती होने वालों में निम्न वर्ग के बच्चे हैं। जब मां से पूछा तो बताया कि पति की आमदनी इतनी नहीं कि सभी के लिए दूध और फल का इंतजाम कर सकें। सप्ताह में एक-दो बार फल आते हैं तो बेटे को देते हैं। औसतन आधा लीटर दूध मंगाते हैं, बेटे के अलावा बाकी के लिए चाय बनती है। इससे बेटियां टोस्ट या रोटी खा लेती हैं। 

कुपोषित बच्चे 

663: बच्चे कुपोषित भर्ती हुए
365: बच्चियां मिली कुपोषित
298: बेटे मिले कुपोषित 

आकंड़े 

325 बच्चे छह महीने तक के कुपोषित
211 बच्चे सात महीने से दो साल तक के
127 बच्चे दो से पांच साल तक के

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कुपोषण के प्रति जागरूकता की भी कमी

प्रमुख अधीक्षक डॉ. अशोक अग्रवाल ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद से भर्ती हुए बच्चों में 55.06 फीसदी बच्चियां और 44.94 फीसदी बच्चे कुपोषित मिल रहे हैं। कोरोना महामारी से पहले अनुपात 52 और 48 फीसदी रहता था। कुपोषित बच्चों को 14 दिन तक केंद्र में रखकर उपचार के साथ पौष्टिक आहार देते हैं। परिजनों को सस्ती दर के पौषक खाद्य सामग्री के प्रति जागरूक भी करते हैं। 

6 सदस्यों में आधा लीटर दूध

पृथ्वीनाथ फाटक निवासी बबीता की तीन साल की बेटी वैष्णवी कुपोषित है। इन्होंने बताया कि पति बेलदारी कर छह से आठ हजार रुपये कमाते हैं। छह सदस्यों में आधा लीटर दूध आता है। 10 साल के बेटे को दूध-फल देते हैं। बेटी चाय-रोटी खा लेती है।  

बेटा होने पर दूध बढ़ाया

सिरकी मंडी निवासी पुष्पा की तीन बेटियां और एक बेटा है। बेटी में कुपोषण की पुष्टि होने पर भर्ती कराया। पति मजदूरी करते हैं। इन्होंने बताया कि घर में चाय लायक दूध ही आता था, बेटियां चाय-रोटी खा लेती थीं। बेटा होने के बाद आधा लीटर दूध मंगाने लगे हैं। 

बेटियों को दूध के लिए पैसे नहीं

नगला फकीरचंद की धर्मवती की पांच बेटियां हैं, इनकी तीन साल की बच्ची कुपोषित है। इन्होंने कहा कि पति जूते की फैक्टरी में काम करते हैं। सात लोगों में आधा किलो दूध लेते हैं। ये चाय में हो जाता है, पैसे इतने नहीं हैं कि बेटियों के लिए दूध खरीद सकें। 
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