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एटा अभिषेक आत्महत्या प्रकरण: न्याय की आस टूटने पर अवसादग्रस्त अभिषेक ने खुद को मार ली गोली, पिता ने की थी मुख्यमंत्री से शिकायत

Wed, 22 Sep 2021 05:08 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा

सार

रवींद्र सिंह चौहान का अभिषेक इकलौता पुत्र था। जिसकी मौत से परिजन गमगीन हैं। रवींद्र का कहना है कि पुत्र नौ मार्च को पिज्जा लेने के लिए घर से निकला था। तभी उसको पुलिस ने पकड़ लिया और मेरी दुनिया ही उजाड़ दी। अब घर में एक बेटी ही बची है। वहीं किशोर के चाचा पुलिस में तैनात हैं। उन्होंने में भतीजे की सिफारिश की थी, लेकिन पुलिस ने नहीं मानी। 
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एटा: मृतक अभिषेक का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एटा के बापू नगर निवासी अभिषेक की खुदकुशी पुलिस प्रताड़ना की काली कहानी चीख-चीख कर बयां कर रही है। उसके जेल जाने के बाद ही परिजनों ने झूठे मुकदमे की शिकायत एसएसपी-डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक की थी। तमाम सबूत मुहैया कराए। कहने को जांच शुरू भी की गई लेकिन पुलिस अपनों के बचाती रही और रवेंद्र का छोटा सा परिवार एक झटके में उजड़ गया। न्याय की आस टूटने पर अभिषेक ने मंगलवार को खुद को गोली मारकर जान दे दी।

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एसएसपी को दिया था शिकायत पत्र
पिता रवेंद्र सिंह चौहान कहते हैं कि बेटे को न्याय दिलाने के लिए 18 मार्च को तत्कालीन एसएसपी सुनील कुमार सिंह को शिकायत पत्र देकर चौकी प्रभारी मोहित राणा की झूठी कहानी को लेकर सबूत भी दिए। आश्वासन तो मिला लेकिन भरोसा नहीं हुआ तो अगले दिन तत्कालीन आईजी अलीगढ़ पीयुष मोर्डिया के दरबार में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। लेकिन पुलिस अपनी बदमानी बचाती रही और बेटा जेल में उस कसूर की सजा काटता रहा जो उसने किया ही नहीं था। 21 मार्च को मुख्यमंत्री को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।

एडीजी से मिला था परिवार
रवेंद्र का कहना है कि एसएसपी उदय शंकर सिंह से पहली बार 31 मार्च को मुलाकात कर पूरा वाकया बताया। एक ऑडियो क्लिप उन्हें दी जिसमें दरोगा मोहित राणा झूठे एनडीपीएस मामले में अभिषेक को जेल भेजे जाने की बात अपने मुंह से कह रहा था। इसके बाद भी दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पांच अप्रैल को मानवाधिकार आयोग को रजिस्ट्री कर पुलिस उत्पीड़न की कहानी बताई। नौ अप्रैल को एडीजी आगरा से मिलकर निर्दोष बेटे को जेल भेजने का मुद्दा उठाया।

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ब्यूरोक्रेसी से जब न्याय की उम्मीद टूटी तो रवेंद्र नेताओं के दरों पर भी भटके। 21 अप्रैल को सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड को पूरा मामला बताया। ठीक एक माह बाद 21 मई को अलीगंज विधायक सत्यपाल सिंह राठौर को सीएम को संबोधित पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। रवेंद्र कहते हैं कि यदि समय पर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई कर दी जाती तो अभिषेक शायद ऐसा कदम न उठाता।

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