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कई पैरा मेडिकल कोर्स और 2.50 लाख फीस: फर्जी बोर्ड से हो रहा था विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़, ये है ऑफिस

Tue, 12 Sep 2023 01:48 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा

सार

आरोपी पंकज पोरवाल चिटफंड में अपनी संस्था का पंजीकरण कराया है। इसका मेन ऑफिस शाहगंज में दिखाया गया है। संस्था में पत्नी, भाई और दोस्तों को पदाधिकारी बनाया गया था।
 
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आरोपी का घर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के थाना शाहगंज के गणेश नगर का पंकज पोरवाल छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा था। विभिन्न पैरा मेडिकल कोर्सेज में प्रवेश दिलवाकर फीस के रूप में मोटी रकम वसूल करता था। डिग्री पर लिख देता था कि निजी और सरकारी नौकरी में प्रयोग नहीं कर सकते। इसका पता विद्यार्थियों को नौकरी में भर्ती के दौरान सत्यापन पर चलता था। संचालक ने फर्जीवाड़ा करने के लिए परिजन और मित्रों के नाम से पैरामेडिकल बोर्ड बनाकर चिटफंड कार्यालय में पंजीकरण करा रखा था।

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गोरखपुर के एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि पुलिस की जांच में सामने आया है कि पंकज ने चिटफंड में अपने संस्था का पंजीकरण कराया है। वहां पर उद्देश्य में मेडिकल सेवा को जागरूक करना बताया है। अपनी पत्नी, भाई, चाचा और मित्रों को सोसाइटी का पदाधिकारी बनाया। खुद की दिल्ली से संबद्धता बताकर जालसाजी करने लगा।

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 यह भी आरोपी
आरोपी संचालक पंकज पोरवाल के भाई इंद्रीवर पोरवाल, पत्नी कंचन पोरवाल, चाचा जयवीर प्रसाद, मित्र नरेश कुमार, कमलकांत, सुरेंद्र कुमार, दर्शन कुमार खट्टरी, मोहित कुमार, अनिरुद्ध कुमार, निखिल कुमार, कुलदीप वर्मा, रुचि गुप्ता और प्रेमचंद्र को पुलिस ने आरोपी बनाया है। वह पदाधिकारी बनाए थे।

कई पैरा मेडिकल कोर्स, 2.50 लाख फीस
चौरीचौरा के विशंभरपुर निवासी शिकायतकर्ता विजय प्रताप सिंह को पूर्व में कुशीनगर के हाटा थाने से जेल भेजा गया था। जमानत पर छूटने के बाद कोर्ट के आदेश पर उन्होंने चौरीचौरा थाने में 13 जनवरी को केस दर्ज कराया। पुलिस ने जांच शुरू की तो शाहगंज में अब्दुल कलाम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के बारे में पता चला। यह संस्था एएनएम, जीडीए, मेडिकल ड्रेसर, सीएमएस एंड ईडी, डीएमएलटी, डीएमआरटी, एक्सरे, ईसीजी, सीएमएलटी, सीसीसीई, डेंटल नर्सिंग, डीओटीटी, डायलिसिस टेक्निशियन के डिप्लोमा-डिग्री कोर्स करवाते थे। छात्रों के प्रवेश के बाद कई किस्तों में ढाई लाख रुपये तक फीस ली जाती थी।
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डिग्री पर लिखते थे, नहीं कर सकते नौकरी में प्रयोग
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि नियमानुसार संस्था को खोलने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट पैरामेडिकल या अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में पंजीकरण कराना होता है। मगर, इस संस्था का पंजीकरण नहीं था। डीजीएमई और सीएमओ दफ्तर में भी कोई प्रमाण नहीं मिला। संस्था के फर्जी होने का पता चला। विद्यार्थियों को दी जाने वाली डिग्री पर अंग्रेजी में साफ-साफ लिखा जाता था कि किसी भी सरकारी या प्राइवेट नौकरी में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। आरोपी अब्दुल कलाम इंस्टीट्यूट व आयुष पैरामेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के नाम से अंक पत्र व प्रमाण पत्र देते थे। यह सभी फर्जी होते थे। पैरामेडिकल बोर्ड संचालित करने के लिए किसी भी सक्षम मेडिकल फैकल्टी के प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति-रजिस्ट्रेशन प्राप्त नहीं किया गया है।

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