आगरा औषधि विभाग की जांच में तीन फर्मों बंसल मेडिकल एजेंसी, एमएसवी मेडि पॉइंट और ताज मेडिको ने 20 महीने में 223 करोड़ रुपये की दवाओं का कारोबार दिखाया है। इसमें नकली दवाओं की आशंका जताई गई है।
औषधि विभाग की जांच में तीन फर्मों ने बीते 20 महीने में 223 करोड़ रुपये की दवाओं का कारोबार किया। इनमें नामी कंपनी के नाम पर नकली दवा होने की भी आशंका है। इस पर खरीदारों को नोटिस भेजकर दवाओं का रिकाॅर्ड मांगा जा रहा है। इससे इन दवाओं का नमूना लेकर जांच की जा सके। कंपनी को भी इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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सहायक आयुक्त औषधि बस्ती मंडल नरेश मोहन दीपक ने बताया कि बंसल मेडिकल एजेंसी, एमएसवी मेडि पाॅइंट, ताज मेडिको की जांच में फर्जी अभिलेखों से दवाओं की बिक्री की जानकारी मिली। इन फर्म से बीते वित्तीय वर्ष में 168 करोड़ रुपये की दवाओं की बिक्री दर्शाई। इस साल एक अप्रैल से 22 अगस्त तक 55.5 करोड़ रुपये का कारोबार मिला। इस तरह से 20 महीने में 223 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।
इनमें नामी कंपनियों के नाम से नकली दवा की भी आशंका है। ऐसे में जांच में जिन खरीदारों ने ये दवाएं खरीदी हैं। इनको नोटिस भेजकर रिपोर्ट मांग रहे हैं। इसमें पूछा गया है कि कितनी दवाएं खरीदीं, किस मर्ज की दवाएं हैं। किस बैच नंबर और कंपनी की दवाएं हैं। इनके आधार पर इन दवाओं की जांच कराई जाएगी। संबंधित कंपनी को भी इसका विवरण भेजा जाएगा।
ट्रांसपोर्ट कंपनी में सुखमनि फार्मा की 10 लाख रुपये की दवाएं सीज
औषधि विभाग ने लखनऊ की सुखमनि फार्मा की 10 लाख रुपये की दवाओं को ट्रांसपोर्ट कंपनी में सीज कर दिया है। ये दवाएं आगरा के हे मां मेडिकोज से खरीदी गई थीं। नकली होने की आशंका पर फर्म ने वापस कर दिया है। कंपनी के प्रतिनिधि आने पर इनकी जांच की जाएगी। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि हेे मां मेडिकोज और बंसल मेडिकल एजेंसी की जांच में नकली दवाओं का खेल पकड़ा गया था।
हे मां मेडिकोज ने लखनऊ के सुखमनि फार्मा को भी करीब 10 लाख रुपये की दवाएं बेची थीं। नकली दवाओं का रैकेट पकड़ में आने पर फर्म संचालक ने विभाग के नाम ये दवाएं वापस की हैं। इनको झांसी गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी में सीज कर दिया गया है। इसमें बुखार, खांसी, एंटीबायोटिक समेत 11 तरह की दवाएं हैं। संबंधित कंपनी को भी इसकी जानकारी दे दी है। उनके अधिकारी या प्रतिनिधि आने के बाद इन दवाओं की जांच की जाएगी। तभी नमूने भी लिए जाएंगे।