पुुडुचेरी-चेन्नई में नकली दवाएं बनाकर आगरा में भंडारण कर चार राज्यों में खपाया जा रहा था। औषधि विभाग की टीम ने ऐसी आठ फर्मों की करीब 71 करोड़ की दवाएं सीज की हैं। जांच के लिए 24 नमूने भी लैब भेजे हैं। जांच पूरी होने के बाद इन फर्मों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। सिंडिकेट में 40 दवा विक्रेताओं के शामिल होने के सुराग मिले हैं। वहीं नकली दवा प्रकरण में रविवार को चाैथा केस दर्ज किया गया। साथ ही बंसल मेडिकल एजेंसी के संचालक संजय बंसल सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके यहां से दो कार्टन में नकली दवाएं, लैपटाॅप, बिल बरामद किए गए हैं।
कमिश्नरी में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की एडिशनल कमिश्नर रेखा एस. चौहान ने बताया कि तमिलनाडु के चेन्नई, पुडुचेरी में नकली दवा बनाने की फैक्टरी चिह्नित की गई हैं। वहां की सरकार कार्रवाई कर रही है। आगरा से भी अधिकारी जांच करने जाएंगे। दवा माफिया आठ फर्म के नाम पर प्रदेश में कानपुर, लखनऊ, बरेली के पते पर दवाएं मंगवाते थे। इनको ट्रेन के जरिये आगरा में ही उतारकर अवैध भंडारण किया जा रहा था।
यहां से ही डमी फर्मों के जरिये तमिलनाडु, पुडुचेरी, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में काला कारोबार किया जा रहा था। इस सिंडिकेट में 40 दवा विक्रेता जांच के दायरे में आए हैं। इनकी जांच चल रही है, कई और गोदाम हो सकते हैं। इसके लिए मुखबिर और अधिकारी गोपनीय जांच कर रहे हैं। दवाओं का काला कारोबार करने के लिए 15 डमी फर्म भी चिह्नित की हैं। इनके नाम पर पर ये कई राज्यों में कारोबार कर रहे थे। दवाओं को मंगवाने और भेजने में ये रेलवे सेवा का उपयोग कर रहे थे। डमी फर्म में महाराष्ट्र के मुंबई और उत्तर प्रदेश की अलीगढ़, आगरा, बरेली, कानपुर और लखनऊ के पते मिले हैं। इन सभी की जांच चल रही है।
वहीं, रविवार को एक और मुकदमा थाना कोतवाली में लिखा गया। इसके बाद बंसल मेडिकल एजेंसी के संचालक संजय बंसल, उसके भाई मुकेश और भतीजे सोहित बंसल को गिरफ्तार कर लिया गया। औषधि निरीक्षक कपिल शर्मा ने केस दर्ज कराते हुए बताया कि नामनेर निवासी संजय की बंसल मेडिकल एजेंसी नाम से दुकान और गोदाम है। एजेंसी पर पुडुचेरी की श्री अमान फार्मा और मीनाक्षी फार्मा से दवाइयों की सप्लाई होती है।
बंसल मेडिकल से मिली दवाओं के सैंपल और बिल को सनोफी कंपनी को भेजा गया था। उन्होंने फर्म पर अपनी कंपनी की दवाओं की सप्लाई नहीं करने की बात कही। जांच में नकली दवाओं की पुष्टि हुई है। डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह केस भी एसआईटी को ट्रांसफर किया जाएगा। टीम को रिश्वत देने के मामले में हे मां मेडिको का संचालक हिमांशु अग्रवाल पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
अब तक हुई कार्रवाई
- 22 अगस्त: टेंपो में लदी 80 लाख रुपये की टैबलेट एलेग्रा 120 एमजी जब्त कीं। इसमें यूनिस, वारिस, विक्की कुमार, सुभाष कुमार, हिमांशु और फरहान के खिलाफ केस दर्ज कराया गया।
- 24 अगस्त: हे मां मेडिकोज का संचालक एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने के मामले में पकड़ा। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा-8 के तहत हिमांशु अग्रवाल के जेल भेजा।
- 28 अगस्त: हे मां मेडिकोज मोती कटरा स्थित गोदाम में तीन दवाएं रोसुवास 20-40 और एलेग्रा 120 एमजी की 2.20 करोड़ रुपये की सीज कीं। मोती कटरा में ही 60 करोड़ की दवाओं से भरा गोदाम सील किया। जांच के लिए 14 नमूने लिए। इसमें हिमांशु अग्रवाल, मीनाक्षा फार्मा पुडुचेरी के एके राजा, न्यू बाबा फार्मा लखनऊ के संचालक विक्की कुमार, पार्वती ट्रेडर्स लखनऊ के संचालक सुभाष कुमार के खिलाफ केस दर्ज कराया गया।
- 30 अगस्त: राधे मेडिकल एजेंसी, मोती कटरा स्थित दो मंजिला गोदाम में 10 करोड़ रुपये की दवाएं सीज की गईं। इसका संचालक अभी मौके पर नहीं आया है।
- 31 अगस्त: बंसल मेडिकल एजेंसी, एमएसवी मेडी प्वाइंट, ताज मेडिकाे में फर्जी अभिलेखों से नकली दवाओं का कारोबार संचालित करने पर नाै के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया। इन तीनों फर्म ने एक अप्रैल से 22 अगस्त तक 55 करोड़ की दवाओं का कारोबार किया है। 4.50 लाख की दवाएं जब्त की हैं। जांच के लिए 10 नमूने लिए हैं।
फव्वारा के बाजार में तीन फर्म
पुलिस और औषधि विभाग की टीम की पूछताछ में संजय बंसल ने बताया कि उनकी तीन फर्म हैं। इनमें एक बंसल मेडिकल गोगिया मार्केट (फव्वारा), दूसरी मुबारक महल मार्केट में ताज मेडिको और हाॅस्पिटल रोड पर एमएसवी मेडि प्वाइंट नाम से है। उसका भतीजा सोहित राजा नामक व्यक्ति को व्हाट्सएप पर ऑर्डर भेज देता है। वह दवाओं को एमएस लाॅजिस्टिक के माध्यम से चेन्नई होते हुए ट्रेन से आगरा तक भेज देता है। इसके बाद आगे सप्लाई की जाती हैं। दवाएं उनकी तीनों फर्म पर पहुंच जाती हैं। वह आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान कर देते हैं।
डमी फर्म बनाकर कर रहा कारोबार
टीम की पूछताछ में पता चला कि आरोपी संजय बंसल ने डमी फर्म बना रखी थी। इस फर्म का लाइसेंस अपने भाई मुकेश बंसल के नाम पर ताज मेडिको के नाम से लिया है। औषधि विभाग की टीम जब जांच करने के लिए ताज मेडिको के गोदाम पर पहुंची तो उसमें दवाएं नहीं मिलीं। हालांकि, कंप्यूटर चेक करने पर 378 दवाएं दिखाने की पुष्टि हुई। एक दवा बंसल मेडिकल एजेंसी के बिल में दर्ज थी। आरोपियों के गोदाम से सात तरीके की दवाएं बरामद की गई हैं।
ब्रांडेड कंपनी के एक बैच नंबर पर खपा दीं 1000 गुना नकली दवाएं
दवा माफिया ने ब्रांडेड कंपनी की दवाओं के सुरक्षा फीचर में भी सेंधमारी की। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी से नकली क्यूआर कोड बनाया। यहां तक कि कंपनी के एक ही बैच नंबर से 1000 गुना तक दवाएं बनाकर बाजार में खपा दीं। इसमें एक ही बिल को बार-बार दर्शाने पर ये खेल पकड़ में आया। एफएसडीए की एडिशनल कमिश्नर रेखा एस. चौहान ने बताया कि माफिया ने नकली दवा के खेल में हाईटेक तरीका अपनाया। एआई से नकली क्यूआर कोड बनवाया। कंपनी के एक-एक बैच नंबर पर खांसी, एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जिक, मधुमेह, उच्च रक्तचाप समेत कई तरह की 1000 गुना मात्रा में दवाएं बनवाकर बाजार में खपा दीं।
तब हुई शिकायत
नामी कंपनी को जब निर्माण से ज्यादा दवाएं बाजार में मिलने लगीं तब विभाग से इसकी शिकायत की। 3-4 महीने तक रेकी करने के बाद साक्ष्य जुटाए फिर छापा मारा। इसमें एसटीएफ की भी मदद ली गई। इतना ही नहीं माफिया ने एक ही बिल से कई गुना तक कारोबार किया। दवाओं की जांच भी की जाती, तो वो एक ही बिल को एक बार में दिखाते। इगोदाम में छापे के वक्त जब सभी दवाओं के बिल मांगने पर ये खेल पकड़ में आया।