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घी नहीं 'जहर' खा रहे हैं: 18 नामी कंपनियां... वितरकों पर कसा गया शिकंजा, यूपी सहित इन राज्यों में सप्लाई

Mon, 06 Jan 2025 10:29 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में नकली घी फैक्टरी का पर्दाफाश किया गया। इस फैक्टरी में 18 नामी कंपनियों के नाम पर घी तैयार किया जा रहा था, जिसकी सप्लाई यूपी के अलावा अन्य राज्यों में भी है। 
 
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नकली घी की फैक्टरी पकड़ी गई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के ताजगंज क्षेत्र के कहरई मोड़ के पास नकली घी की फैक्टरी पकड़ने के बाद पुलिस अब वितरकों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। नकली घी ट्रांसपोर्ट के माध्यम से 19 जिलों में भेजा जाता था। असम से जम्मू-कश्मीर तक वितरक बनाए गए थे। डीसीपी ऑफिस से घी बेचने वालों की धरपकड़ के लिए इन जिलों के डीएम और एसपी को पत्र लिखा गया है। स्थानीय पुलिस और एफएसडीए की टीम को मिलकर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
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नकली घी की फैक्टरी के मालिक ग्वालियर स्थित दाल बाजार की मैना वाली गली निवासी बृजेश, नीरज और पंकज अग्रवाल हैं। पुलिस ने मुकदमे में मालिकों को भी आरोपी बनाया है। उनकी गिरफ्तारी के लिए एक टीम तीन दिन तक ग्वालियर में डेरा डाले रही। फैक्टरी मालिकों के घरों पर ताले लटके मिले। उनके प्रतिष्ठान पर भी पुलिस की टीम गई, लेकिन बंद मिले। पुलिस ने उनके परिचित और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटाई है। काॅल डिटेल और व्हाट्सएप चैट भी देखी गई। आरोपी मालिक हाथ नहीं आ सके हैं। तीन दिन बाद पुलिस की टीम ग्वालियर से खाली हाथ लौट आई है। अन्य संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। थाना ताजगंज के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि फैक्टरी मालिकों के वारंट के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया जा रहा है।

 

डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि फैक्टरी में तैयार नकली देसी घी ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से दूसरे जिलों में भेजा जाता था। सबसे अधिक माल यूपी के जिलों में सप्लाई होता था। इनमें आगरा के अलावा मेरठ, प्रयागराज, बहराइच, गोंडा, वाराणसी, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, सीतापुर, फैजाबाद, गोरखपुर शामिल हैं।

 

इन जिलों के डीएम और एसपी को पत्र लिखा गया है। इसमें वितरकों के बारे में जानकारी दी गई है। अगर, नकली घी बेचने की पुष्टि होती है तो मुकदमे में आरोपियों को शामिल किया जाएगा। वहीं पंजाब, राजस्थान, असम, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और बिहार के जिलों में भी पत्राचार किया जा रहा है।

 

व्हाट्सएप चैट से भी मिली जानकारी
नकली घी आधे से कम लागत में तैयार हो जाता था। इसके बाद बाजार में कंपनी के रेट पर बेचा जाता था। फैक्टरी मालिक विक्रेताओं को भी अच्छा कमीशन देते थे। इस कारण खपत ज्यादा होती थी। दुकानदारों से कम रेट में ठेल और खोखे वाले खरीदते थे। घी से खाद्य पदार्थ बनाए जाते थे। पुलिस को मैनेजर की व्हाट्सएप चैट से कई विक्रेताओं के बारे में जानकारी मिली है।

 
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ये है मामला
पुलिस ने ताजगंज क्षेत्र में 2 जनवरी को नकली घी की फैक्टरी पर छापा मारा था। मारुति प्रवासम काॅलोनी के रहने वाले मैनेजर राजेश भारद्वाज के साथ चार अन्य कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। हजारों लीटर नकली घी और माल बरामद किया था। पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट के आदेश पर मैनेजर और कर्मचारियों को जेल भेजा था।
 
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