डाक्टर बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी की जाली डिग्रियों से शिक्षक, इंजीनियर के बाद अब डाक्टर बनाए जाने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हद की बात तो यह है कि जालसाजों ने आठवीं पास शख्स को एमबीबीएस डाक्टर बना दिया। उसने न केवल अपना क्लीनिक खोल लिया बल्कि सर्जरी भी करने लगा। ऐसी दो डिग्रियां लेकर पहुंची दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी में जांच पड़ताल की तो दोनों का कोई रिकार्ड नहीं मिला। दोनों के खिलाफ दिल्ली में केस दर्ज कराया जा चुका है। इनमें एक तो डाक्टरी की डिग्री बेचने का गोरखधंधा भी कर रहा था।
क्राइम ब्रांच ने बताया कि डाक्टर मनोज साहू दिल्ली के राणा पार्क में एमआरडी नर्सिंग होम के नाम से क्लीनिक चला रहा था। डाक्टर गौरपदा विश्वास ने शिवा पार्क में क्लीनिक खोल रखा था। इनकी जाली मार्कशीट का खुलासा दिल्ली के ही एनजीओ मीनाक्षी परिवार ने किया। इसकी सूचना पर क्राइम ब्रांच ने पड़ताल की तो पता चला कि डाक्टर गौरपदा जाली डिग्री बनाने का रैकेट भी चला रहा है। एनजीओ ने उसका स्टिंग ऑपरेशन करके दावा किया था कि उसने एमबीबीएस और एमडी की डिग्री का पैकेज देने के 19 लाख मांगे। साथ में यह भी ऑफर दिया कि दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) में इसका रजिस्ट्रेशन भी कराकर देगा। इसके बाद जाली डिग्री को कोई जांच में भी पकड़ नहीं पाएगा।
क्राइम ब्रांच ने तीन दिन पहले गौरपदा और फिर मनोज को गिरफ्तार किया। मनोज के माता-पिता ने बताया कि वह आठवीं तक पढ़ा है। उसे गौरपदा ने एमबीबीएस की डिग्री बनवाकर दी। इसका डीएमसी से रजिस्ट्रेशन होना भी बताया था। जांच मेंरजिस्ट्रेशन भी फर्जी पाया गया। दोनों की जाली डिग्री आगरा की डाक्टर बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के नाम से है। इन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज का छात्र बताया गया है। क्राइम ब्रांच ने दोनों जगह इनकेरिकार्ड खंगाले। कहीं कोई रिकार्ड नहीं मिला। इससे पूरी तरह साबित हो गया कि डिग्री जाली हैं। इस मामले में पहले ही दिल्ली के समयपुर बादली थाना में केस दर्ज कराया जा चुका है।
जांच हो चुकी है, दोनों इस कॉलेज के छात्र नहीं रहे हैं। दिल्ली क्राइम ब्रांच को इसकी जानकारी दे दी गई है।
-डाक्टर एसके गर्ग
प्राचार्य, एसएन मेडिकल कॉलेज
दोनों मार्कशीट का सत्यापन कराया जा रहा है, जांच रिपोर्ट मिलने पर दोनों मामलों में केस दर्ज कराया जाएगा।
-केएन सिंह
कुलसचिव, डाक्टर बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी
ये हैं आरोपी
मनोज कुमार साहू पुत्र लक्ष्मी साहू मूल रूप से समस्तीपुर बिहार का रहने वाला है। फिलहाल दिल्ली में रह रहा था। उसकी एमबीबीएस की जाली डिग्री 1998 बैच की है।
गौरपदा विश्वास पुत्र भावेश विश्वास, नोएडा के खानपुर का है। उसकी जाली डिग्री 1997 की है। उसके पास कई और जाली डिग्री मिली हैं।
ऐसे बने फर्जी डाक्टर
-एसएन से 1997 और 1998 में एमबीबीएस करने वाले दो डाक्टर की मार्कशीट को स्कैन करके उसमें नाम और रोल नंबर बदल दिया गया।
-इसी तरह डीएमसी के डाक्टर के रजिस्ट्रेशन लेटर को स्कैन करके उसमें नाम और पते बदल दिए गए।
-दोनों मार्कशीट ऐसी चुनी गई जिनमें अंक 60 फीसदी से ज्यादा थे। अंतिम वर्ष में तो 68 फीसदी अंक हैं।
आईईटी के पिछले दस सालों के रिकार्ड की जांच
-इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट की फर्जी मार्कशीट मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में संचालित कोर्स के पिछले दस सालों के रिकार्ड की जांच की जाएगी। इनकी सीट और चार्ट में दर्ज छात्रों के नामों का मिलान किया जाएगा।