फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध पिस्टल केस की विवेचना 10 दिन में एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। कमिश्नरेट पुलिस की धीमी रफ्तार से एसटीएफ भी पीछे चल रही है। थाना नाई की मंडी पुलिस अब तक केस से संबंधित पत्रावलियां नहीं दे सकी है। इससे विवेचक अपने विवेचना आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। उन्होंने डीसीपी हेड क्वार्टर को पत्र भी लिखा है।
इस मामले में 24 मई को केस दर्ज किया गया था। मुख्य आरोपी भूपेंद्र सारस्वत, मीडियाकर्मी शोभित चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त असलहा बाबू संजय कपूर सहित 7 को नामजद किया। प्रारंभिक जांच में पता चला था कि आरोपियों ने जो शस्त्र लिए हैं, उनके पास उनके कागजात नहीं हैं। लाइसेंस भी फर्जी तरीके से बनाए जाने का आरोप है। मामला गंभीर होने के बावजूद विवेचना कछुआ गति से चल रही है। कमिश्नरेट पुलिस के पास मुकदमा दर्ज करने के लिए आए पत्र साफ लिखा था कि विवेचना एसटीएफ को भेजी जाए।
विवेचना ट्रांसफर तो हो गई, लेकिन अब तक विवेचक हुकुम सिंह को पत्रावलियां नहीं भेजी गई हैं। उन्होंने सोमवार को डीसीपी हेड क्वार्टर को पत्र भी लिखा है। उधर, विवेचना में लापरवाही से आरोपियों को बचने का माैका मिल रहा है। पीड़ित शिकायतकर्ता विशाल भारद्वाज का आरोप है कि वह 1 साल से लगातार पुलिस से शिकायत कर रहा था। मगर, उसकी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उसे मुख्यमंत्री से मिलने जाना पड़ा। तब एसटीएफ ने जांच की। नाै महीने की जांच के बाद मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बावजूद विवेचना में देरी हो रही है।
उधर, पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि पत्रावलियों के संबंध में एसटीएफ के अधिकारी उनसे सीधे आकर संपर्क कर सकते हैं। विवेचना पहले ही दिन ट्रांसफर कर दी गई थी। केस से संबंधित किसी तरह की पत्रावली लेने के लिए अभी तक संपर्क नहीं किया गया है।